मेरा कचरा-मेरी जिम्मेदारी के संकल्प से मप्र बनेगा देश का अग्रणी राज्य:डॉ. यादव

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री सहित अन्य केंद्रीय मंत्रियों से की भेंट

नर्मदा परियोजनाओं संबंधी मुद्दों पर हुई उच्चस्तरीय बैठक
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दो दिवसीय नई दिल्ली भ्रमण में मध्यप्रदेश के हितों से संबंधित विषयों पर विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों और संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट एवं चर्चा की।
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल के अतिरिक्त अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से नर्मदा परियोजनाओं के लंबित मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने भी हिस्सा लिया। बैठक में नर्मदा परियोजनाओं से संबंधित अंतर्राज्यीय मामलों पर विचार-विमर्श किया गया। परियोजनाओं के कार्यों की गति को तीव्र करने के संबंध में भी चर्चा हुई। डॉ. यादव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से पृथक-पृथक भेंट कर मध्यप्रदेश के हितों से संबंधित चर्चा की। डॉ. यादव ने गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों से भी अलग-अलग मुलाकातों में अंतर्राज्यीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में बातचीत की।
राज्य ने स्वच्छता के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां अर्जित की
मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर मध्यप्रदेश के जागरूक नागरिकों के अमूल्य और अनुकरणीय सहयोग से राज्य ने स्वच्छता के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां अर्जित की हैं। पर्यावरण संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में राज्य सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026′ को प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है। डॉ. यादव ने कहा कि यह नवीन नियम केवल नगरीय निकायों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें राज्य के सभी शासकीय विभागों में समान रूप से लागू किया गया है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों से निकलने वाले कचरे को भी समेकित कर वैज्ञानिक पद्धति से प्रबंधित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दूरगामी नियम का सफल क्रियान्वयन केवल शासकीय प्रयासों से संभव नहीं है, इसके लिए राज्य के प्रत्येक नागरिक, संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान को आगे आकर अपनी महती भूमिका निभानी होगी। डॉ. यादव ने भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य को रेखांकित करते हुए प्रदेशवासियों से अपनी दैनिक दिनचर्या में विशेष आदतों को सम्मिलित करने के लिए कहा कि पर्यावरण को अक्षुण्ण रखने के लिए हमें यह दृढ़ संकल्प लेना होगा कि हम किसी भी प्रकार का कचरा न तो खुले में फेंकेंगे और न ही उसे जलाएंगे। अपने घर, गली, मोहल्ले और नगर को कचरा मुक्त बनाने के लिए यह आवश्यक है कि नागरिक अपने घरों से निकलने वाले अपशिष्ट को चार श्रेणियों— ‘गीला, सूखा, सैनिटरी एवं स्पेशल केयर’ में अनिवार्य रूप से अलग-अलग करके ही अधिकृत कचरा संग्रहण वाहन को सौंपें।
पानी की व्यक्तिगत बोतल साथ रखने की आदत डालें
कचरे को संपदा में बदलने और पुनर्चक्रण के सिद्धांतों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने नागरिकों से गृह-स्तर पर जैविक खाद निर्माण अपनाने की अपील की है। उन्होंने आह्वान किया कि पुराने कपड़े, पुस्तकें और अन्य उपयोगी वस्तुओं को फेंकने के बजाय स्थानीय ‘रिड्यूस, रियूस, रिसाईकल’ केंद्रों में जमा करें। इसके साथ ही, पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली विकसित करने के लिए बाजार जाते समय हमेशा अपना कपड़े का झोला और पानी की व्यक्तिगत बोतल साथ रखने की आदत डालें, जिससे एकल-उपयोग प्लास्टिक और अपशिष्ट की उत्पत्ति को प्राथमिक स्तर पर ही न्यूनतम किया जा सके। डॉ. यादव ने राज्य के समस्त नगरीय निकायों को प्रदेश के प्रत्येक घर, व्यावसायिक दुकान और झुग्गी बस्तियों से नियमित, समयबद्ध और निर्बाध रूप से कचरे का संग्रहण करने के निर्देश दिए। इस जन-सरोकार के कार्य में किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी। डॉ. यादव ने कहा कि स्वच्छता हमारे सामूहिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संतुलन और जीवन की समग्र गुणवत्ता का आधार स्तंभ है। हम आज यदि पूर्ण उत्तरदायित्व के साथ कार्य करेंगे, तभी अपनी भावी पीढ़ी को एक स्वच्छ, समृद्ध और सुरक्षित मध्यप्रदेश सौंप पाएंगे।

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