राम से द्रोह करने वाले को धरती पर जगह नहीं मिली
अयोध्या । जगद्गुरु रामभद्राचार्य की रामकथा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि केरल उच्च न्यायालय ने 2009 और 2011 में लव जिहाद पर चिंता व्यक्त की थी कि यह धार्मिक जनसांख्यिकी को बदलने की साजिश है। हमने इस पर कभी ध्यान नहीं दिया। हमने 2020 में उत्तर प्रदेश में इस पर एक सख्त कानून बनाया। हमें सतर्क रहना चाहिए। जिस किसी ने भी राम को अपने जीवन का आदर्श बनाया है, उनका कल्याण सुनिश्चित किया गया है।
योगी ने साफ तौर पर कहा कि जिस भी व्यक्ति के भीतर ‘भारत का डीएनए है, उसके आदर्श केवल और केवल भगवान राम ही हो सकते हैं। राजनीति और व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर देखें तो हर भारतीय के संस्कारों में राम समाहित हैं। उन्होंने कहा कि जिनकी भारत के प्रति आस्था नहीं है, उन लोगों के लिए भारत की धरती ‘धर्मशाला’ नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत उन आक्रमणकारियों के लिए शरणस्थली नहीं है जिन्हें भारत में विश्वास नहीं है, जो भारत के प्रति वफादार नहीं हैं और जो भारत के मूल्यों और परंपराओं का सम्मान नहीं कर सकते। ऐसे लोगों के लिए भारत की भूमि आश्रय नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि मारीच और रावण, उच्च कुल और श्रेष्ठ व्यवस्था में जन्म लेते हैं, लेकिन पशुवत मारे जाते हैं, क्योंकि प्रभु श्री राम के साथ द्रोह करते हैं। उन्होंने कहा कि रावण ने माता जानकी का अपहरण कर लिया था, और भगवान श्री राम ने उन्हें छुड़ाने के लिए हर संभव प्रयास किया। उन्होंने उत्तर और दक्षिण भारत को एकजुट किया। यह महिलाओं की गरिमा की रक्षा का एक उदाहरण है। यह ‘लव जिहाद’ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए एक आदर्श उदाहरण के रूप में काम कर सकता है और इसे सबके सामने प्रस्तुत किया जा सकता है।
भारत देशद्रोहियों की शरणस्थली नहीं, रावण-मारीच का होगा अंत : योगी