सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर मुकदमा नहीं चल सकता
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि वैवाहिक विवाद का सक्षम न्यायालय के समक्ष विधिवत समझौता हो जाने के बाद उसी विवाद से जुड़े आपराधिक मुकदमे को जारी रखना संबंधित पक्ष का उत्पीडऩ और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने दहेज प्रताडऩा के आरोप में पति और उसके स्वजन के खिलाफ दर्ज एफआईआर व उससे संबंधित आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करते हुए कहा कि समझौते के बाद मुकदमे को लंबित रखना न्याय के हित में नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा कि शिकायत में सास और विवाहित ननद के खिलाफ केवल सामान्य आरोप लगाए गए हैं। विवाहित ननद अपने पति के साथ अलग रहती है और उसके विरुद्ध कोई ठोस या विशिष्ट आरोप नहीं हैं। अदालत ने कहा कि केवल पारिवारिक रिश्ते के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। एकलपीठ ने पाया कि चार्जशीट में भी दहेज मांगने या क्रूरता से जुड़े कोई विशिष्ट और ठोस आरोप नहीं हैं। ऐसे में जब वैवाहिक विवाद का आपसी समझौते से निपटारा हो चुका है, तब आपराधिक कार्यवाही जारी रखना केवल अनावश्यक मुकदमेबाजी और उत्पीडऩ को बढ़ावा देगा। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने एफआईआर और उससे संबंधित समस्त आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करने का आदेश दिया।
समझौते के बाद दहेज केस जारी रखना उत्पीडऩ :मप्र हाई कोर्ट