ऑनलाइन गेमिंग में दांव लगाते ही कटेगा जीएसटी : सुप्रीम कोर्ट


जीएसटी कर योग्य आपूर्ति होने पर लगाया जाता है
खेल की प्रकृति खिलाड़ी के जीतने या हारने से नहीं बदलती
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग, फैंटेसी स्पोर्ट्स और दांव लगाकर खेले जाने वाले अन्य वर्चुअल खेलों पर वस्तु एवं सेवा कर को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि कसीनो और जुआ गतिविधियों में जीएसटी की गणना खिलाडिय़ों के दांव लगाने के समय से होगी न कि खेल खत्म होने के बाद कैसीनो के वास्तविक मुनाफे के आधार पर।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि जीएसटी किसी कारोबारी के लाभ या हानि पर नहीं, बल्कि कर योग्य आपूर्ति होने पर लगाया जाता है। अदालत ने कहा कि जैसे ही कोई व्यक्ति कसीनो में चिप्स या टोकन खरीदकर किसी खेल में दांव लगाता है, उसी समय जीएसटी लागू हो जाता है। इसके लिए खेल का नतीजा आने या खिलाड़ी के जीतने-हारने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कसीनो में इस्तेमाल होने वाले चिप्स और टोकन केवल दांव लगाने का माध्यम हैं। खिलाड़ी इनके बिना खेल में भाग नहीं ले सकता। इसलिए यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि चिप्स या टोकन के जरिये होने वाले लेनदेन में कोई कर योग्य दावा उत्पन्न नहीं होता। पीठ ने कहा कि यदि जीएसटी की गणना केवल कैसीनो के अंतिम लाभ या हानि के आधार पर की जाए तो इससे कर देयता को कम दिखाने या छिपाने की संभावना पैदा हो सकती है। इसके विपरीत, खिलाड़ी की ओर से दांव लगाए जाने के आधार पर कर निर्धारित करने से कर प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी रहती है। अदालत ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी दांव हार जाता है, तो कसीनो उस रकम को अपनी कमाई मानता है। लेकिन जब कोई खिलाड़ी बड़ी रकम जीत जाता है, तो कसीनो यह कहता है कि उसे नुकसान हुआ है, इसलिए उस राशि पर कर नहीं लगाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कसीनो में खेल की प्रकृति खिलाड़ी के जीतने या हारने से नहीं बदलती। जैसे ही कोई व्यक्ति खेल में हिस्सा लेकर दांव लगाता है, उसी समय जीएसटी लागू हो जाता है। बाद में खिलाड़ी जीते या हारे, या कसीनो कोई भुगतान करे, इससे जीएसटी की देनदारी खत्म नहीं होती।

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