पांच महत्वपूर्ण संकल्प लेने का किया आग्रह
नई दिल्ली : अमरनाथ यात्रा शुरू होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के श्रद्धालुओं के नाम एक विशेष पत्र लिखकर उन्हें शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि बाबा बर्फानी के दर्शन हर शिवभक्त के लिए सौभाग्य का विषय हैं और यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से सुरक्षित यात्रा करने, पर्यावरण की रक्षा करने और स्थानीय लोगों का सहयोग करने की अपील की। साथ ही उन्होंने पांच महत्वपूर्ण संकल्प लेने का भी आग्रह किया, ताकि यह यात्रा आस्था के साथ-साथ सेवा और राष्ट्र निर्माण का संदेश भी दे सके।
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि अमरनाथ धाम की यात्रा आध्यात्मिक ऊर्जा देने के साथ-साथ भारत की विविधता में एकता की भावना को भी मजबूत करती है। अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और परंपराओं से जुड़े लोग एक ही आस्था के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मोदी ने श्रद्धालुओं से पांच महत्वपूर्ण संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने यात्रा मार्ग पर स्वच्छता बनाए रखने और किसी भी तरह की गंदगी न फैलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी श्रद्धालु प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करें तथा बारिश, ठंड और कठिन मौसम को देखते हुए पूरी सावधानी बरतें। इसके अलावा उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश देते हुए आग्रह किया कि यात्रा पर होने वाले कुल खर्च का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा जम्मू-कश्मीर के स्थानीय उत्पादों की खरीद पर खर्च करें, ताकि स्थानीय लोगों की आजीविका मजबूत हो सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि अमरनाथ यात्रा केवल भगवान शिव के दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सनातन परंपरा, सेवा भाव और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से कहा कि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। मौसम संबंधी चेतावनियों और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों और प्रशासन का उद्देश्य प्रत्येक श्रद्धालु की यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाना है। इसलिए सभी लोग सहयोग की भावना से यात्रा करें और नियमों का पालन करें। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी श्रद्धालुओं के सहयोग से इस वर्ष की यात्रा शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सफल होगी।
अमरनाथ यात्रा सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण : मोदी