लोकतंत्र का भविष्य गंभीर परिणामों से भरा हुआ है
मुख्य चुनाव आयुक्त का पक्षपातपूर्ण आचरण् गंभीर चिंता का विषय
नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा कि लोकतंत्र को मौजूदा सरकार से सबसे बड़ा खतरा है। पार्टी ने यह बात उस समय कही है, जब विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और जवाबदेही को बहाल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से कदम उठाने का आग्रह किया। विपक्षी दलों के कई नेताओं ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने कहा कि जब संस्थागत व्यवस्था विफल हो जाती है, तो लोकतंत्र अराजकता में बदल जाता है और जब न्यायपालिका विफल हो जाती है, तो यह गणतंत्र के पूरी तरह टूटने का संकेत देता है।
विपक्षी दलों ने आग्रह किया कि पूरी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को रोक दिया जाए और ऐसे समय में शुरू की जाए, जब अगले विधानसभा चुनाव कम से कम पांच साल दूर हो। उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों के कथित तौर पर गलत इस्तेमाल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा जहां जरूरी हो, वहां मतपत्रों को फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। निर्दलीय सांसद कपिल सिबल समेत 24 विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में लिखा गया है कि लोकतंत्र का भविष्य गंभीर परिणामों से भरा हुआ है जब संस्थाएं स्वयं दमन के साधन बन जाती हैं और सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ाती हैं। न्यायाधीश एकांतवास में नहीं रहते। जमीनी हकीकत से वाकिफ हैं। जब हर संभव उपाय विफल हो जाता है, तब भी लोग न्यायपालिका पर भरोसा रखते हैं। इसलिए जब न्यायपालिका प्रतिक्रिया देने में विफल रहती है, तो यह गणतंत्र के पूर्ण पतन का संकेत देता है। नेताओं ने कहा कि वे अदालत का रुख इसलिए कर रहे हैं। क्योंकि, उनका मानना ??है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं दबाव में हैं और कई मामलों में चुनावी परिणाम जनता की इच्छा को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। विपक्षी दलों ने 2014 के बाद से चुनाव आयोग के आचरण का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि 2014 से पहले आयोग में शामिल व्यक्तियों की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठने के कुछ अपवादों को छोडक़र शायद ही कोई उदाहरण था। लेकिन 2014 के बाद से सरकार द्वारा की गई लगभग हर नियुक्ति ऐसे व्यक्तियों की हुई है, जो सरकार से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं और चुनाव परिणामों में हेरफेर करने के लिए सरकार के इशारों पर खुलेआम काम करते हुए देखे गए हैं। विपक्ष ने अपने पत्र में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का “स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण आचरण”, चुनावी प्रक्रिया के दौरान और उसके परिणामों में भाजपा को उनका खुला और निर्भीक समर्थन गंभीर चिंता का विषय है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता कमजोर हुई है।
विपक्षी दलों ने सीजेआई को लिखा पत्र