सुप्रीम कोर्ट में 93 हजार केस लंबित, चिंता का विषय
नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस के.एम. जोसेफ ने केंद्र सरकार से कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा दोबारा की गई जजों की नियुक्ति संबंधी सिफारिशों को लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी सिफारिशें केंद्र सरकार पर बाध्यकारी होती हैं और उन पर अमल किया जाना चाहिए, जब तक कि नियुक्ति के खिलाफ कोई ठोस, प्रासंगिक और उचित कारण न हो।
जस्टिस जोसेफ ने कहा कि जब कॉलेजियम सेकेंड जजेज केस और थर्ड जजेज केस के तहत किसी नाम की सिफारिश करता है और उसे दोबारा दोहराता है, तो केंद्र सरकार उन प्रस्तावों को लंबित न रखे। यह समझा जाना चाहिए कि ऐसे उम्मीदवारों की नियुक्ति की जानी चाहिए, जब तक कि उनके रास्ते में कोई वास्तव में मजबूत, प्रासंगिक और न्यायिक नियुक्ति से जुड़ा कारण न हो। जोसेफ ने जजों की नियुक्तियों को लेकर कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच चल रहे टकराव को भी जल्द समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थाओं के बीच यह असहमति और असंतुलन खत्म होना चाहिए, ताकि देश को सबसे योग्य और बेहतरीन जज मिल सकें। जस्टिस के.एम. जोसेफ ने कहा कि जब वह सबसे बेहतरीन न्यायाधीशों की बात करते हैं तो उसका मतलब केवल कानून का गहरा ज्ञान रखने वाले व्यक्ति से नहीं है, बल्कि ऐसे व्यक्ति से है जिसमें अनेक नैतिक और मानवीय गुण हों। उन्होंने कहा कि जब मैं सबसे बेहतरीन कहता हूं, तो उसमें कई तरह के गुण शामिल होते हैं। केवल कानून पढ़ लेना ही पर्याप्त नहीं है। जस्टिस जोसेफ ने कहा कि न्यायाधीश ऐसे होने चाहिए जो निडर और स्वतंत्र हों। उन्होंने सरकारों को आगाह करते हुए कहा कि किसी भी सरकार के लिए यह सोचना अल्पकालिक और अविवेकपूर्ण होगा कि यदि उसे ऐसे लोग मिल जाएं जो जरूरत पडऩे पर उससे सवाल न करें, तो उसने कोई बड़ी जीत हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस समय करीब 93 हजार मामले लंबित हैं और सिर्फ जजों की संख्या बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जब तक नए मामलों के लगातार बढ़ते प्रवाह पर नियंत्रण नहीं किया जाता, तब तक केवल अधिक जज नियुक्त करने से लंबित मामलों का बोझ कम होना मुश्किल है।
कॉलेजियम की दोबारा भेजी सिफारिशें बाध्यकारी:जस्टिस जोसेफ