जल नहीं रहा तो हमारा कल भी सुरक्षित नहीं रहेगा – कमिश्नर श्री जामोद

जल गंगा संवर्धन अभियान में हुआ ऐतिहासिक धरोहर अजब कुंवरि बाबड़ी का कायाकल्प
कमिश्नर तथा स्वयंसेवी संस्थाओं ने जल संरक्षण के लिए किया श्रमदान
रीवा

रीवा संभाग के सभी जिलों में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत रीवा नगर निगम क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक अजब कुंवरि बाबड़ी का जीर्णोद्धार और साफ-सफाई का अभियान चलाया जा रहा है। नगरीय प्रशासन विभाग, नगर निगम तथा जन अभियान परिषद द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से चलाए जा रहे इस अभियान में रीवा संभाग के कमिश्नर बीएस जामोद ने श्रमदान किया। बाबड़ी को साफ-सुथरा बनाने के लिए सामाजिक संगठनों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों ने भी बढ़चढ़ कर श्रमदान किया। इसमें पिछले सात दिनों से श्रमदान करके इसका कायाकल्प किया गया है। अब बाबड़ी में लगभग 10 फीट गहराई में स्वच्छ जल संचित है। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए कमिश्नर श्री जामोद ने बाबड़ी परिसर में पौधे भी रोपित किए।

इस अवसर पर कमिश्नर ने कहा कि हमारे पूर्वजों को जल का महत्व भलीभांति पता था। उन्होंने पूरे देश में सुंदर जल संरचनाओं का निर्माण कराया। इनके माध्यम से जल संरक्षण और संवर्धन का संदेश देने के साथ-साथ धरती माँ की कोख में असीमित जल भण्डार का संचय किया गया। अजब कुंवरि बाबड़ी रीवा की ऐतिहासिक जल धरोहर है। इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए हम सब मिलकर प्रयास करें। जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जल नहीं रहा तो हमारा कल भी सुरक्षित नहीं रहेगा। मानव, सभी जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के जीवन का आधार जल है। हर व्यक्ति जल गंगा संवर्धन अभियान में सहभागी बनकर जल संरक्षण में योगदान दे। यह हमारे पूर्वजों को आदर और सम्मान देने के साथ भावी पीढ़ी के जीवन को बचाने का भी प्रयास है। बिछिया नदी भी जिले की बड़ी जल धरोहर है। इसके पुनर्जीवन के लिए पिछले कई वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नदी को साफ-सुथरा रखने के साथ-साथ इसके दोनों तटों पर बड़ी संख्या में पौधे रोपित करके ही इसे सदानीरा बनाने का प्रयास सफल होगा। पक्के मकानों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तथा कुंओं और नलकूपों में रिचार्जिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से बनवाएं।

कार्यक्रम में जन अभियान परिषद के संभागीय समन्वयक प्रवीण पाठक ने कहा कि अजब कुंवरि बाबड़ी का निर्माण 1664 से 1670 के मध्य रीवा के महाराजा भाव सिंह द्वारा कराया गया था। तत्कालीन महारानी अजब कुंवरि रानी के नाम पर इसका नामकरण हुआ। इसके स्थापत्य में मुगलकालीन, राजपूतकालीन तथा आधुनिक स्थापत्य की झलक मिलती है। इसकी सफाई के लिए जन अभियान परिषद से जुड़ी स्वयंसेवी संस्थाओं तथा विद्यार्थियों द्वारा लगातार सात दिनों से श्रमदान किया जा रहा है। नगर निगम द्वारा परिसर की साफ-सफाई, पेवर ब्लॉक लगाने तथा बाउन्ड्रीवॉल बनाने का कार्य गत वर्ष किया गया था। इस स्थल को नगर के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। कार्यक्रम में उपायुक्त नगर निगम प्रकाश द्विवेदी, संयुक्त संचालक नगरीय विकास हरिशंकर मिश्रा, प्राचार्य कन्या महाविद्यालय विभा श्रीवास्तव, संयुक्त आयुक्त सुदेश मालवीय, श्री सुजीत द्विवेदी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सामाजिक संगठनों, गायत्री परिवार, ब्रम्हकुमारी विश्वविद्यालय, सत्य सांई सेवा संगठन, एनसीसी और एनएसएस के प्रतिनिधि शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने किया।

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