वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने जारी की चेतावनी


2050 तक दुनिया भर में 70 फीसदी तक बढ़ सकते हैं कैंसर के मामले
नई दिल्ली: वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने दुनिया भर में कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर चेतावनी जारी की है. कैंसर की ग्लोबल स्थिति पर अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, अगर देश तुरंत कदम नहीं उठाते हैं, तो 2050 तक कैंसर के नए मामलों की सालाना संख्या लगभग 35 मिलियन तक पहुंच सकती है.
अभी हर साल कैंसर के लगभग 20.6 मिलियन नए मामले सामने आते हैं और कैंसर से लगभग 10 मिलियन लोगों की मौत होती है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कैंसर पहले से ही दुनिया भर में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है. इससे पता चलता है कि यह बीमारी न सिर्फ व्यक्ति को शारीरिक रूप से प्रभावित करती है, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक और भावनात्मक रूप से भी बर्बाद कर देती है. हालांकि मेडिकल साइंस ने कई तरह के कैंसर की रोकथाम और इलाज में काफी तरक्की की है, फिर भी कम और मध्यम आय वाले देशों में लोगों को समय पर जांच, दवा और सही इलाज पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के डायरेक्टर-जनरल डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा कि कैंसर एक बहुत ही निजी बीमारी है जो लगभग हर किसी को किसी न किसी तरह प्रभावित करती है. हालांकि, किसी व्यक्ति का जीवित रहना इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि वह कहां पैदा हुआ है या उसकी आय का स्तर क्या है. डॉ. टेड्रोस ने आय और रहने की जगह के आधार पर कैंसर के इलाज में भारी असमानताओं को लेकर खास चिंता जताई. उन्होंने आगे कहा कि ये असमानताएं अनिवार्य नहीं हैं, बल्कि नीतिगत फैसलों का नतीजा हैं जिन्हें ठोस और सामूहिक प्रयासों से बदला जा सकता है.
कैंसर केयर तक असमान पहुंच
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की एक रिपोर्ट बताती है कि हर किसी के पास कैंसर से बचने का एक जैसा मौका नहीं होता है. अमीर देशों में रहने वाले लोगों के पास अक्सर स्क्रीनिंग प्रोग्राम, एडवांस्ड ट्रीटमेंट और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों तक बेहतर पहुंच होती है. कई कम इनकम वाले देशों में, मरीजों का पता बाद में चलता है, जब ट्रीटमेंट ज्यादा मुश्किल और महंगा हो जाता है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई देश अभी भी उन सभी लोगों को जरूरी कैंसर की दवाएं या रेडिएशन थेरेपी देने में नाकाम रहते हैं जिन्हें इनकी जरूरत होती है. ट्रीटमेंट का ज्यादा खर्च कई परिवारों को केयर में देरी करने या उसे बंद करने पर मजबूर करता है, जिससे हेल्थ में असमानता और बढ़ जाती है. मोटापा, फिजिकल इनएक्टिविटी, अनहेल्दी डाइट और एयर पॉल्यूशन की बढ़ती दरों के कारण मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसलिए, कैंसर की रोकथाम एक पॉलिटिकल प्रायोरिटी बनी रहनी चाहिए.

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