प्रधानमंत्री ने विरोधियों का नाम लिए बिना साधा निशाना
भारत का राष्ट्रहित सर्वोपरि, अफवाह फैलाने वाले निराश
भारत ने जीत हासिल कर ली है
जोधपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण पैदा हुआ ऊर्जा संकट से उबरने के लिए अपनी सरकार की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने तारीफ करते हुए कहा कि संकट के दौरान भारतीय कूटनीति बेहतरीन प्रदर्शन कर रही थी और जिस तरह से देश ने इस संकट से निपटा है, वह इतिहास की किताबों में दर्ज किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि एनर्जी सेक्टर के एक्सपर्ट्स ने एलपीजी की कीमतों के दो हजार रुपये तक पहुंचने की भविष्यवाणी की थी, लेकिन सरकार के विभिन्न फैसलों, जैसे कि एक दशक से अधिक समय से चल रही दूरदर्शी नीति के कारण यह टल गया।
पीएम ने कहा “पश्चिमी एशिया में युद्ध के कारण पूरी दुनिया में दहशत बना हुई है। हर देश संकट में था, इस जंग ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया है। आज प्रमुख देश तेल की कमी से जूझ रहे हैं, लेकिन 21वीं सदी के नए भारत के दृढ़ संकल्प और प्रयासों ने इन चुनौतियां पर विजय हासिल कर ली है।” उन्होंने कहा “जंग के इस दौर में,अन्य देशों के साथ भारत की मित्रता बहुत उपयोग साबित हुई। जब यह संकट शुरू हुआ, तब भारत 25-26 देशों से तेल और ऊर्जा आयात कर रहा था। लेकिन संकट के समय भारत की कूटनीति का जलवा दिख गया, दूसरे देशों के साथ हमारे संबंध इस संकट की घड़ी में बहुत काम आए।” मोदी ने विपक्षियों पर निशाना साधा और ऊर्जा संकट पर कहा “बहुत सी अफवाहें फैलाई गईं, लोगों को उकसाया गया और राजनीतिक खेल खेले गए, लेकिन जिनकी नीयत खराब थी, वे सफल नहीं हुए।” उन्होंने कहा “दूर-दराज के इलाकों में थोड़ी-बहुत रुकावटों को छोडक़र, सप्लाई में कोई बड़ी दिक्कत नहीं आई। सिर्फ डीजल और पेट्रोल कंपनियों को ही 75,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। यह नुकसान एक नई रिफाइनरी बनाने में आने वाले खर्च के बराबर है। सरकार ने इस नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी उठाई। हमने प्रति लीटर 10 रुपये एक्साइज़ ड्यूटी भी कम की, ताकि जनता पर अधिक बोझ न पड़े।”उन्होंने कहा”भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि राष्ट्रीय हित और अपने नागरिकों का हित सबसे ऊपर है। हमारा मंत्र है नागरिक देवो भव। देश इस अप्रत्याशित चुनौती से यूं ही नहीं उबर पाया यह हमारी दूरदर्शी नीतियों की सफलता का भी नतीजा है, जो पिछले एक दशक से चल रही हैं।”
नया भारत अपने संकल्पों से पीछे नहीं हटता
प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यक्ति एवं देश का स्वाभिमान तभी ऊंचा रह सकता है, जब वो आत्मनिर्भर हो, दूसरों पर कम से कम निर्भर हो। उन्होंने कहा कि चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी और अप्रत्याशित क्यों न हो, नया भारत अपने संकल्पों से न तो पीछे हटता है और न ही अपनी रफ्तार कम करता है। भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि हमारे लिए राष्ट्रहित और राष्ट्र के नागरिकों का हित सर्वोपरि है। नागरिक देवो भव: हमारा मंत्र है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जो लोग भारत को असफल होते देखना चाह रहे हैं, इसके लिए भविष्यवाणी भी करने लग गए थे। वो आज निराशा की गर्त में पड़े होंगे।
भारत जो ठान लेता है, वो करके दिखाता है
गुजरात के साणंद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जो ठान लेता है, वो करके दिखाता है। पांच साल पहले भारत ने संकल्प लिया था कि देश को सेमीकंडक्टर हब बनाएंगे। हम डिजाइन इन इंडिया, मेक इन इंडिया के मंत्र को लेकर आगे बढ़े हैं और आज देश के तीसरे सेमीकंडक्टर प्लांट में भी चिप पैकेजिंग का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो रहा है।’ पांच साल पहले भारत ने ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनने का संकल्प लिया था। ‘डिजाइन इन इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन से प्रेरित होकर, हम लगातार आगे बढ़े हैं। आज, देश के तीसरे सेमीकंडक्टर प्लांट में कमर्शियल चिप पैकेजिंग का प्रोडक्शन शुरू हो गया है।
संकट के समय कई राजनीतिक खेल खेले गए : मोदी