आत्मनिर्भरता ही संकट में देश का असली रक्षक:राष्ट्रपति


ऑपरेशन सिंदूर से मिला सबक
नई दिल्ली :आज के दौर में आत्मनिर्भरता सिर्फ विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मजबूती की भी अहम जरूरत बन गई है। ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ कर दिया कि किसी देश की सैन्य तैयारी और रणनीतिक प्रभाव को मजबूत बनाने में स्वदेशी रक्षा क्षमताओं की कितनी बड़ी भूमिका होती है। यह बातें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज के 2023 और 2024 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कही।
मुर्मू ने कहा कि दुनिया इस समय संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में वही देश ज्यादा मजबूत स्थिति में रहता है, जो अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर कम और खुद पर ज्यादा निर्भर हो। आत्मनिर्भर देश संकट की घड़ी में अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ विकास संबंधी प्राथमिकताओं को भी बेहतर तरीके से पूरा कर सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि आज दुनिया कई पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है और ऐसे समय में सतत विकास कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाने, ऊर्जा और पानी की बचत करने, हरियाली बढ़ाने, कचरा कम करने और अपने काम के हर स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की अपील की। मुर्मू ने कहा कि मजबूत, कुशल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के हितों की भी रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि रूश्वस् देश के रक्षा ढांचे की रीढ़ है। रणनीतिक महत्व के सैन्य ठिकानों का निर्माण और रखरखाव कर यह संगठन सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
‘महिलाओं ने देश के संस्थानों को मजबूत बनाया’
राष्ट्रपति ने रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना, वायुसेना और अन्य रक्षा संगठनों में महिलाएं लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं और उन जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभा रही हैं, जिन्हें कभी उनकी पहुंच से बाहर माना जाता था। महिलाओं की पेशेवर दक्षता, नेतृत्व क्षमता, साहस और समर्पण ने देश के संस्थानों को और मजबूत बनाया है तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती दी है।

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