आपातकाल में भारतीय लोकतंत्र को निर्ममता से कुचल दिया गया था : मोदी


आपातकाल हमारे संविधान पर सीधा हमला था
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 1975 के आपातकाल को याद करते हुए इसे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला करार दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आपातकाल ने उन अनगिनत नागरिकों के असाधारण साहस को भी उजागर किया, जिन्होंने चुप रहने से इनकार किया और संविधान में निहित आदर्शों को बनाए रखा।
प्रधानमंत्री ने कहा “आपातकाल हमारे संविधान पर सीधा हमला था। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं को निलंबित कर दिया गया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए, राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया तथा हमारे लोकतंत्र की आधारशिला माने जाने वाले संस्थानों पर प्रहार किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देशवासियों के लिए संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा “हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। संविधान की भावना से प्रेरित होकर हम ऐसे भारत का निर्माण करेंगे, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहेगा।”” उन्होंने कहा “यह हमें लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने को प्रेरित करता है।
इंदिरा गांधी ने कुर्सी बचाने को लगाई थी इमरजेंसी :रविशंकर
बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 1975 में लगाई गई इमरजेंसी का मकसद सिफऱ् तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कुर्सी बचाना था। भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे विवादित दौर में से एक के 50 साल पूरे होने पर उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करने का आरोप लगाया। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इआज लोग देश में लोकतंत्र बचाने की बात करते हैं और संविधान दिखाते हैं। आज इन 50 सालों में उनके असली चेहरे को बेनकाब करना ज़रूरी है कि 50 साल पहले क्या हुआ था। इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द कर दिया गया था। वह सुप्रीम कोर्ट गईं लेकिन उन्हें रोक नहीं मिली कहा गया कि आप सदन में आ सकती हैं लेकिन बोल नहीं पाएंगी। इंदिरा गांधी को बचाने की कोशिश में इमरजेंसी का गलत इस्तेमाल किया गया। इमरजेंसी सिफऱ् इंदिरा गांधी की कुर्सी बचाने के लिए लगाई गई थी।
आपातकाल में कुचली गई संविधान की आत्मा :
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के इतिहास में आपातकाल को एक ‘काला अध्याय’ करार दिया। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। अमित शाह ने कहा कि उस दौरान कांग्रेस ने संविधान की आत्मा को कुचलने का प्रयास किया था। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि 25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे अंधकारमय दौर था। गृह मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि यह दिन भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का वह काला अध्याय है, जब इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी ने सत्ता के अहंकार और लालच में आकर देश के नागरिकों की अभिव्यक्ति की आजादी पर ताला लगा दिया था। उन्होंने कहा कि उस समय के शासकों के लिए देश के लोकतांत्रिक मूल्य उनकी व्यक्तिगत सत्ता की भूख के सामने बेहद बौने साबित हो गए थे।

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