जबलपुर : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने अहम आदेश में कहा है “सिर्फ संभावना के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. सबूतों की ऐसी पूरी कड़ी होनी चाहिए, जिससे इस निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके कि अपराध इसी आरोपी ने किया है.” इस आदेश के साथ ही युगलपीठ ने जिला न्यायालय के आदेश को निरस्त करते हुए दो लोगों को दोषमुक्त कर दिया.
युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया “गवाहों के अनुसार मृतक तथा अपीलकर्ता अक्सर अपने खेत में साथ जाते थे. मृतक व अपीलकर्ता के खेत लगे हुए थे. घटना के दिन भी तीनों साथ गये थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक शराब का सेवन किये हुए था. मृतक के नाक और मुंह से खून बह रहा था. इसके अलावा पुलिस द्वारा हथियार के तौर पर जब्त किये गये पत्थर में खून नहीं पाया गया. उसमें सिर्फ मिट्टी लगी हुई थी.” युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा “पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृत्यु का कारण चोट आना है.”हाई कोर्ट ने कहा “पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक नशे में था. कानून का यह स्थापित नियम है कि सजा जितनी कड़ी होगी, सबूत भी उतने ही पुख्ता होने चाहिए. दोषसिद्धि केवल अनुमानों और अटकलों पर आधारित नहीं हो सकती. शक चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, वह सबूत की जगह नहीं ले सकता. आखिरी बार साथ देखे जाने वाली बात यहां लागू नहीं होती क्योंकि अक्सर अपीलकर्ता और मृतक अपने खेतों में एक साथ जाते थे. परिस्थितिजन्य सबूतों की कसौटी पर मामला खरा नहीं उतर रहा है. बुनियादी सिद्धांत है कि अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने से पहले आरोपी का दोषी होना जरूरी है. सिर्फ दोषी होने की संभावना से पक्के निष्कर्षों तक नहीं पहुंचा जा सकता.”
अनुकंपा नियुक्ति अधिकार नहीं आपात राहत है
मप्र हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। निगम में अनुकंपा नियुक्ति की मांग करते हुए चल रही एक याचिका का निराकरण करते हुए कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई “वंशानुगत रोजगार” या “अधिकार” नहीं है। बल्कि मृत कर्मचारी के स्वजन को अचानक सामने आए आर्थिक संकट से उबारने के लिए दी जाने वाली एक सीमित एवं अपवादात्मक राहत है। यह अधिकार नहीं है। अगर परिवार वर्षों तक स्वयं का भरण-पोषण करता रहा है तो इसके बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य केवल उस परिवार को तत्काल राहत देना है जो कमाने वाले सदस्य की अचानक मृत्यु से आर्थिक संकट में आ गया हो। यदि परिवार लंबे समय तक स्वयं का निर्वाह कर चुका है तो अनुकंपा नियुक्ति का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सिर्फ संभावना के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता : मप्र हाई कोर्ट