भारत-नेपाल सीमा विवाद को सुलझाने में किसी तीसरे की जरूरत नहीं’: विदेश मंत्रालय


जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अटूट हिस्से
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने भारत-नेपाल सीमा विवाद को सुलझाने में किसी भी तीसरे पक्ष की भागीदारी को पूरी तरह खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा ‘हमने सीमा संबंधी सभी मुद्दों से निपटने के लिए द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं। यह साफ होना चाहिए कि भारत-नेपाल के बीच यह द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।’
जायसवाल ने दोहराया कि दोनों देशों के पास सीमा मुद्दों को सुलझाने के लिए पहले से ही स्थापित तंत्र मौजूद हैं। जायसवाल ने कहा ‘जम्मू-कश्मीर के जिक्र के संबंध में हम यह कहना चाहेंगे कि हम भारत के आंतरिक मामलों पर संयुक्त प्रेस बयान में ऐसे बेवजह के जिक्र को पूरी तरह से खारिज करते हैं।’प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि जिन संस्थाओं या देशों का इस मुद्दे पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, उन्हें ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए। उन्होंने साफ किया, ‘जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अटूट हिस्से हैं। जिन लोगों का ऐसे मामलों में कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, उन्हें इन पर कोई भी टिप्पणी करने से बचना चाहिए।’सरकार का रुख साफ है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इसमें किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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