मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा का सिमटता दायरा
भोपाल। प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के सरकार कई दावे करती है लेकिन हकीकत दूर-दूर तक ऐसी कतई नहीं है। 15 साल में 49 हजार से अधिक सरकार स्कूलों में ताले पड़ चुके हैं। अब सांदीपनि विद्यालयों में एक से पांच किमी तक के दायरे के कम विद्यार्थियों वाले छोटे स्कूलों को मर्ज किया जा रहा है। वहीं शिक्षकों की स्थिति यह है कि स्वीकृत 2,89,005 पदों में से 1,15,678 रिक्त हैं जो स्वीकृत पद का करीब 40 प्रतिशत है। वहीं 1,968 स्कूलों में एक और 46,417 स्कूलों में दो-दो शिक्षक ही पदस्थ हैं।
केंद्र सरकार द्वारा सदन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच मध्य प्रदेश में करीब सात हजार स्कूल बंद किए गए, जबकि पूरे देश में 18 हजार से ज्यादा स्कूल बंद किए गए हैं। जबकि मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग का बजट लगातार बढ़ा है। बीते पांच साल में मध्य प्रदेश में करीब 7 हजार, ओडिशा में 4 हजार, जम्मू और कश्मीर में 4300, असम में 3500 और पश्चिम बंगाल में 1000 से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। प्रदेश में हर वर्ष स्कूल चले हम अभियान चलाया जाता है ताकि नामांकन दर बढ़े। इसके बावजूद हजारों की संख्या में स्कूल ऐसे हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या 20 से भी कम है। प्रदेश में ऐसे स्कूल 15,170 हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या 20 से कम है। इन स्कूलों में अतिशेष शिक्षकों को पदस्थ नहीं करने की तैयारी है।
300 स्कूलसांदीपनि में मर्ज
प्रदेश के 274 सांदीपनि विद्यालयों में से 161 स्कूलों का भवन निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इनमें 97 स्कूल नए भवनों में शिफ्ट हो चुके हैं, जबकि 64 स्कूलों के भवनों का लोकार्पण अभी बाकी है। जिन विद्यालयों को नए भवनों में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके तहत प्रदेश के 300 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल इस सत्र में उन्हें बंद कर दिया गया।
मप्र में 5 साल में 7 हजार सरकारी स्कूलों में जड़े ताले