नई दिल्ली: भारत में भीषण गर्मी अब जानलेवा रूप लेती जा रही है। एक नए अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि देश में सिर्फ एक दिन की भीषण गर्मी के कारण करीब 3400 अतिरिक्त मौतें होती हैं। स्टडी के मुताबिक, लगातार पांच दिन तक हीटवेव जैसी स्थिति बनी रहने पर यह आंकड़ा लगभग 30 हजार तक पहुंच सकता है।
यह अध्ययन अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर के शोधकर्ताओं पीयूष नारंग और अशोक गाडगिल ने किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, भारत में हीटवेव से होने वाली मौतों के विस्तृत जिला-स्तरीय आंकड़े आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उन्होंने देश के 10 शहरों में गर्मी से होने वाली मौतों पर आधारित अध्ययन और नागरिक पंजीकरण प्रणाली के आंकड़ों का विश्लेषण कर सभी जिलों के लिए अतिरिक्त मौतों का अनुमान तैयार किया। यह अध्ययन ‘फ्रंटियर्स इन एनवायरनमेंटल हेल्थ’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में अतिरिक्त मौतों को आधार बनाया गया है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक मानक है, जिसके तहत किसी विशेष अवधि में हुई कुल मौतों की तुलना सामान्य परिस्थितियों में अनुमानित मौतों से की जाती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, हीटवेव के दौरान होने वाली मौतों का वास्तविक आंकड़ा अक्सर आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाता इसलिए अतिरिक्त मौतों का विश्लेषण ज्यादा सटीक तस्वीर पेश करता है।
यूपी में सिर्फ पांच दिनों की भीषण गर्मी के दौरान करीब 8000 मौतों का अनुमान
रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। हाल के दिनों में मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई इलाकों में तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। अध्ययन के अनुसार अकेले उत्तर प्रदेश में पांच दिनों की भीषण गर्मी के दौरान करीब 8,100 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। वहीं अहमदाबाद, जयपुर और सूरत जैसे शहरों में एक बार की तीव्र हीटवेव के दौरान 250 से अधिक अतिरिक्त मौतें होने की आशंका जताई गई है।
इन राज्यों में गर्मी से हुईं सबसे ज्यादा मौतें
शोध में यह भी सामने आया कि सबसे ज्यादा प्रभावित पांच राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात देश की कुल अनुमानित अतिरिक्त मौतों में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं जबकि भारत की जीडीपी में उनका योगदान केवल 29 प्रतिशत है। शोधकर्ताओं ने इसे “मृत्यु भार और आर्थिक क्षमता के बीच गंभीर असंतुलन” बताया है। उनका कहना है कि जिन राज्यों की आर्थिक क्षमता कम है, वहीं हीटवेव का प्रभाव सबसे ज्यादा दिखाई देता है क्योंकि वहां स्वास्थ्य सुविधाएं, शहरी बुनियादी ढांचा और गर्मी से बचाव की व्यवस्थाएं अपेक्षाकृत कमजोर हैं।
हीटवेव पर डराने वाली रिपोर्ट, भारत में सिर्फ गर्मी से 3400 मौतें