आम कार मालिक खुद नहीं नाप सकते माइलेज:गडकरी


आंख मूंदकर एथेनॉल को दोष देना बिल्कुल गलत
नई दिल्ली । देश में इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर छिड़ी बहस के बीच केंद्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि कोई भी आम कार मालिक खुद अपनी गाड़ी की फ्यूल एफिशिएंसी का सही अंदाजा नहीं लगा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वाहन चालकों को इसके लिए अधिकृत डीलरों के टेस्टिंग उपकरणों पर ही भरोसा करना चाहिए। एक इंटरव्यू में गडकरी ने कहा कि फ्यूल एफिशिएंसी की सही रीडिंग केवल निर्माता-अधिकृत टेस्टिंग इक्विपमेंट से ही मिल सकती है। गडकरी ने कहा “आप और मैं माइलेज चेक नहीं कर सकते। कार का माइलेज केवल कंपनी-अधिकृत डीलर की मशीन का इस्तेमाल करके ही चेक किया जा सकता है।”
गडकरी ने साफ शब्दों में कहा है कि गाड़ी में कोई भी खराबी आने पर आंख मूंदकर एथेनॉल को दोष देना बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने और पेट्रोल-डीजल के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने के लिए बायोफ्यूल का रोडमैप बहुत पहले ही साफ कर दिया गया था। गडकरी ने कहा”सरकार का वैकल्पिक ईंधन यानी बायोफ्यूल को अपनाने का प्लान शुरू से ही एकदम पारदर्शी रहा है। इस बारे में हर स्तर पर जनता को खुलकर जानकारी दी गई है। गाडिय़ां भी एक मशीन हैं और किसी भी मशीन में कभी भी कोई मैकेनिकल खराबी आ सकती है। कोई भी तकनीक 100 प्रतिशत परफेक्ट नहीं होती। गाड़ी की हर मैकेनिकल दिक्कत को जबरन एथेनॉल से जोडऩा ठीक नहीं है।”गडकरी ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। सरकार का रुख पूरी तरह साफ है कि नया फ्यूल आज के वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। गडकरी के मुताबिक फ्यूल नए और पुराने दोनों तरह के वाहनों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और परखा हुआ है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ लोग जानबूझकर इस ईंधन को लेकर भ्रम और डर का माहौल बना रहे हैं। यह आलोचना तथ्यों पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक हित छिपे हुए हैं। इस नीति का सबसे बड़ा मकसद देश के करोड़ों रुपये बचाना और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।

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