नेता केवल स्वार्थवश बदलते हैं पार्टियां : अन्ना


नई दिल्ली

समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा कि संविधान में कहीं भी राजनीतिक दलों का उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा “संविधान हमेशा समाज और राष्ट्र के कल्याण पर केंद्रित रहता है। इसमें किसी भी राजनीतिक दल का उल्लेख नहीं है। आज समाज में विवाद और संघर्ष ऐसे गुटों और राजनीतिक दलों के कारण बढ़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नेता केवल स्वार्थवश ही पार्टियां बदलते हैं।
अन्ना हजारे ने नेताओं के दल-बदल वाले मामलों को लेकर कहा “लोग अपने हितों को ध्यान में रखते हुए एक पार्टी से दूसरी पार्टी में चले जाते हैं, और जहां भी उन्हें अपने लिए लाभ दिखता है, वहां चले जाते हैं।” दल-बदल के मामले में कड़े कानून की मांग करते हुए उन्होंने कहा “ऐसा सख्त कानून बनाया जाना चाहिए जो निर्वाचित नेताओं को दूसरी पार्टियों में शामिल होने से रोके। देश कानूनों के आधार पर चलता है। अगर ऐसा कानून लागू होता है, तो इस तरह की गलतियां नहीं होंगी।”अन्ना हजारे ने कहा है कि अगर दल-बदल को लेकर सख्त कानून बनता है तो कानून लागू होने पर लोग पार्टियां नहीं बदल पाएंगे। अन्ना हजारे ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा हाल ही में क्चछ्वक्क में शामिल होने पर समाज और जनता को विचार करना चाहिए। उन्होंने मतदाताओं से अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते समय सावधानी बरतने की अपील की। अन्ना हजारे ने कहा कि वोटर ही सर्वोपरि है और यह उन्हीं पर निर्भर करता है कि वे किसे वोट दें, सही व्यक्ति को या गलत व्यक्ति को। यदि मतदाता सोच-समझकर निर्णय लें, तो सभी दलों और गुटों में व्याप्त अनियमितताओं को दूर किया जा सकता है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कुछ राजनेता देश और समाज के कल्याण की तुलना में धन और सत्ता में अधिक रुचि रखते हैं

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