मदुरै : मद्रास हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि तमिलनाडु में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों से पता चलता है कि लोगों को उम्मीदवारों की जाति या समुदाय पर ध्यान दिए बिना वोट देने के लिए मनाया जा सकता है। मद्रास हाई कोर्ट ने कहा “तमिलनाडु राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों से पता चला है कि लोगों को उम्मीदवारों की जाति या समुदाय पर विचार किए बिना वोट देने के लिए वास्तव में मनाया जा सकता है। असल में जाति के कारकों को काफी हद तक दरकिनार करके सरकार बनी है। यह याद रखना चाहिए कि राज्य तभी सच्चे बदलाव का दावा कर सकता है जब लोगों की सोच भी बदले। इसलिए, इस सरकार को लोगों के मन से जाति की भावना को खत्म करने की जिम्मेदारी और पहल करनी चाहिए।”
जस्टिस बी पुगलेन्धी ने कहा कि ऑनर किलिंग जातिवाद का चरम रूप है और कहा कि जातिवाद समाज को बांटता है। कोर्ट ने कहा “लोगों के मन में जातिवाद गहराई तक बैठ गया है और यह पूरे सिस्टम को खराब कर रहा है।” कोर्ट ने कहा “चाहे कोई व्यक्ति कितना भी ताकतवर या विशेषाधिकार प्राप्त क्यों न हो, हर कोई किसी न किसी रूप में जातिवाद का सामना कर रहा है। यहां तक कि हम जज भी इससे अछूते नहीं हैं। हमारे आदेशों के पीछे जाति के आधार पर मकसद तलाशे जाते हैं, जबकि मामलों का फैसला मेरिट के आधार पर किया जाता है।” कोर्ट ने कहा, “लोगों की इस सोच को बदलना होगा और सिर्फ राज्य ही ऐसा बदलाव ला सकता है। इसके लिए राज्य को मजबूत पहल करनी होगी। हालांकि, कुछ राजनीतिक पार्टियां भी वोट जुटाने के लिए जाति का इस्तेमाल करके इस सामाजिक बुराई को बढ़ावा दे रही हैं।”कोर्ट ने कहा कि जाति-आधारित सोच तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में ज्यादा फैली हुई है। कोर्ट ने कहा “ऑनर किलिंग एक शर्मनाक काम है।
जज भी जातिवाद से अछूते नहीं : मद्रास हाई कोर्ट