जहां से कांग्रेस प्रत्याशी ने मान रखा था लीड मिलेगी, वहां भी करारी हार
विधानसभा चुनाव में जहां से हुई थी कांग्रेस की जीत, वहां भी काफी पिछड़ी
अनिल त्रिपाठी, रीवा
गत दिवस लोकसभा चुनाव के परिणाम आ गए और भारतीय जनता पार्टी के नेता तथा सांसद जनार्दन मिश्रा को एक बार फिर चुनते हुए तीसरी बार सांसद बनने का गौरव प्रदान कर दिया है। लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद यह भी स्पष्ट हो गया है कि जिस प्रकार से विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के सभी प्रत्याशियों को हराया था वही क्रम सभी विधानसभा क्षेत्रों में एक बार फिर देखने को मिला है। कांग्रेस के बहुत सारे नेताओं के पार्टी छोडऩे और भाजपा ज्वाइन करने का भी भाजपा को खासा फायदा मिल गया।
विधानसभा चुनाव के दौरान सभी क्षेत्रों में लगभग 1लाख़ 95 हजार की कुल लीड बनाई थी यही स्थिति लोकसभा चुनाव में भी बरकरार रही। यानी कि भाजपा ने अपना वोट बैंक इस दौरान बरकरार रखा। जबकि कांग्रेस के वोट विधानसभा चुनाव की तुलना में लगभग 15 फ़ीसदी घट गए।
लोकसभा चुनाव में जनार्दन मिश्रा के पक्ष में देव तालाब, गुढ़, मऊगंज और रीवा की जनता ने काफी सपोर्ट किया। अकेले इन चार विधानसभा क्षेत्र से ही भाजपा की 1लाख 30 हजार के आसपास हो गई थी। कुल मिलाकर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी ने कांग्रेस प्रत्याशी को 1 लाख़ 93 हजार से ज्यादा मतों से हराकर तीसरी बार लोकसभा सांसद बनने का गौरव हासिल कर लिया।
आंकड़ों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी को देव तालाब विधानसभा क्षेत्र से 35 हजार 93 मतों की बढ़त मिली थी। इस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम करते हैं। दूसरे नंबर की लीड गुढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी को मिली। यहां पर भाजपा प्रत्याशी को 63020 मत मिले थे जबकि कांग्रेस को केवल 32821 मत मिले हैं। यानी की 30199 मतों की लीड मिली।
इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व रीवा के वयोवृद्ध नेता नागेंद्र सिंह कर रहे हैं। वही जिस इलाके मऊगंज को कांग्रेस सबसे ज्यादा दमदार मान रही थी वहां पर पूरी तरह से फिस्स हो गई। यहां पर भाजपा उम्मीदवार को 62218 मत मिले जबकि कांग्रेस को 32864 मत मिले हैं। यानी की 29354 मतों की लीड मिली। भाजपा के विधायक यहां पर प्रदीप पटेल का दबदबा बरकरार है जबकि अपने आप को कांग्रेस का धुरंधर नेता मानने वाले सुखेंद्र सिंह बन्ना की असलियत की पोल खुल गई। हालांकि इन पर कांग्रेस विरोधी काम करने के भी दबी जुबान आरोप लग रहे थे।
उधर मन गवा विधानसभा क्षेत्र की जनता ने पूर्व की भांति भारतीय जनता पार्टी को ही जमकर सपोर्ट किया और यहां पर भाजपा को 62449 मत मिले जबकि कांग्रेस को 33894 मतों से संतोष करना पड़ा। यानी की 28555 की लीड रही। विधानसभा क्षेत्र रीवा की स्थिति विधानसभा चुनाव से भी बेहतर रही और यहां पर भाजपा को 69868 मत मिले थे जबकि कांग्रेस को केवल 40000 258 मत प्राप्त हुए यानी 29608 की लीड भाजपा को मिली। यह विधानसभा क्षेत्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का क्षेत्र है। जहां भाजपा ने पहले से बेहतर प्रदर्शन किया है। उधर सिरमौर विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी की कुल लीड 1690 9 थी। यहां पर भाजपा को 52587 और कांग्रेस को 35678 वोट मिले हैं।
त्यौंथर विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा की लीड बरकरार रही लेकिन अन्य विधानसभा क्षेत्र की तुलना में उसे कम कहा जा रहा है। यहां पर भाजपा को 48754 वोट मिले जबकि कांग्रेस को 35435 मत मिले यानी की 13319 की लीड थी। जिस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा प्रतिनिधित्व कर रहे हैं वहां भी भाजपा ने लीड हासिल किया। यहां पर भाजपा को 54886 मत मिले जबकि कांग्रेस को 45671 मत मिले हैं यानी 9215 की लीड रही। यानी कि यह भी कहा जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी जनार्दन मिश्रा अपने गृह विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम लीड ले पाए। वहीं अगर डाक मत पत्र की चर्चा की जाए तो इसमें भी कांग्रेस पीछे ही रह गई। डाक मत पत्रों में कांग्रेस को 898 मत मिले जबकि भाजपा को 2020 वोट मिले। मतलब यहां पर भी 1122 पर मतों का अंतर रहा।
कई क्षेत्रों में कांग्रेस को अपनों का ही नहीं मिल पाया सपोर्ट
लोकसभा चुनाव में एक चीज देखने को अवश्य मिली है कि इस चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी को अपनों का ही उतना आंतरिक समर्थन नहीं मिल पाया जिसकी वह कल्पना कर रहे थे। कांग्रेस प्रत्याशी शुरू से ही यह मानकर चल रही थी कि मऊगंज और गुढ़ विधानसभा क्षेत्र के नेताओं की दम पर वह खांसी लीड कर लेंगे लेकिन यहां पर इसका ठीक उल्टा हो गया। दूसरी चीज यह भी देखने को मिली कि विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के जो प्रत्याशी मैदान में थे उस तरह की मेहनत इस चुनाव में देखने को कहीं भी नहीं मिली। जिसके चलते कांग्रेस एक बार फिर बुरी तरह परास्त हुई।
मोदी लहर और योजनाओं के संचालन का फायदा मिला जनार्दन को
रीवा में मोदी लहर बरकरार है। यह चुनाव परिणाम से स्पष्ट हो गया है। विधानसभा चुनाव में जहां शिवराज सिंह चौहान की लाडली बहना योजना ने भाजपा को बंपर जीत दिलाई थी वही लोकसभा चुनाव में पूरे विंध्य क्षेत्र में मोदी लहर का असर देखने को मिला। उसी का परिणाम था कि रीवा के साथ सतना सीधी और शहडोल में लगातार दूसरी बार सारे कैंडिडेट जितने में सफल रहे। खास बात यह रही कि सब की मार्जिन बेहतर रही केवल सतना लोकसभा सीट ऐसी थी जहां पर जीत का अंतर 1 लाख से नीचे था। वहीं चुनाव के दौरान फैलने वाली अफवाहों पर भी पूरी तरह से विराम लग गया और जिस तरह से चर्चाएं हो रही थी कि यहां वहां भाजपा के नेता ही अंदरुनी विरोध कर रहे हैं जीत के बाद सब कुछ खत्म सा दिखाई दिया।