बेंगलुरु :कर्नाटक हाई कोर्ट ने तय कानूनी नियमों का पालन किए बिना गैर-कानूनी गिरफ्तारियां करने वाले पुलिस अधिकारियों की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या पुलिस को लगता है कि वर्दी होने का मतलब है कि वे कानून की परवाह किए बिना कुछ भी कर सकते हैं।
जज ने चेतावनी देते हुए कहा “तुम्हारे पास वर्दी है, तो क्या तुम कुछ भी कर सकते हो? क्या आपको लगता है कि किसी को जेल भेजना कोई खेल है? अगर कोई अपराध हुआ है, तो निश्चित रूप से उसे जेल भेजें, लेकिन कानून के अनुसार।” बेंच ने सवाल किया कि धोखाधड़ी के मामले में शिकायतकर्ता के पति को इतनी जल्दबाजी में क्यों गिरफ्तार किया गया। बेंच ने कहा “क्या पत्नी के शिकायत दर्ज करते ही पति को जेल भेज दिया जाना चाहिए? क्या धोखाधड़ी के मामले में आप उसे जेल भेज सकते हैं? आरोप है कि पति-पत्नी के बीच पार्टनरशिप में धोखाधड़ी की गई है। पति लॉक-अप में क्यों है?”जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से कानून स्पष्ट है कि गिरफ्तारी आखिरी विकल्प होना चाहिए, खासकर उन अपराधों में जिनमें सात साल या उससे कम की सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने पाया कि इस मामले में आरोपी व्यक्ति की गिरफ्तारी को सही ठहराने के लिए कोई ठोस वजह नहीं थी, सिवाय इस दावे के कि उसने जांच में सहयोग नहीं किया। कोर्ट ने अपराध दर्ज होने की तारीख से लेकर पदभार बदलने तक नाममात्र की भी जांच न करने के लिए पिछले जांच अधिकारी के आचरण की जांच का भी निर्देश दिया।
तुम्हारे पास वर्दी है तो कुछ भी कर सकते हो :कर्नाटक हाई कोर्ट