किसी भी राज्य ने नहीं किया सुप्रीम कोर्ट निर्देश पालन


सडक़ हादसे में जान बचाने के लिए बरत रहे ढिलाई
नई दिल्ली:देश में हर साल सडक़ हादसे में करीब 1.77 लाख लोगों की मौत होती है। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि हादसों में घायलों की जान बचाने के लिए पूरी ट्रॉमा केयर व्यवस्था की मांग सुप्रीम कोर्ट ने की थी लेकिन अब तक किसी राज्य में यह पूरी तरह तैयार नहीं है। पिछले 9 महीनों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सुप्रीम कोर्ट को जो आंकड़े प्रस्तुत किए हैं उनसे यह स्थिति सामने आई है।
शीर्ष अदालत ने सडक़ दुर्घटनाओं में जान बचाने के लिए राज्यों को नौ महत्वपूर्ण कदम उठाने के लिए कहा था। इनमें से पांच सबसे जरूरी उपाय हैं एक समान आपातकालीन फोन नंबर, जीपीएस से लैस एंबुलेंस, गुड समैरिटन कानून, ट्रॉमा रजिस्ट्री और बचाव कार्य के लिए तय प्रोटोकॉल। ये पांच उपाय दुर्घटना के बाद के गोल्डन ऑवर यानी पहले 60 मिनट के दौरान लोगों की जान बचाने में बहुत अहम मानी जानी जाती हैं। अदालत में प्रस्तुत किए गए करीब 1200 पन्नों के दस्तावेजों से पता चलता है कि देश में सडक़ हादसों में होने वाली हर तीन में से दो मौते जिन आठ राज्यों में होती हैं। वह राज्य हैं- उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु,महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, बिहार और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। उनमें से 7 राज्यों ने अभी तक अपने सभी इमरजेंसी नंबरों को एकीकृत कर 112 से नहीं जोड़ा है। वहीं, कर्नाटक ने इस संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। 2024 में हुई 1.77 लाख मौतों में से दो-तिहाई मौतें आठ राज्यों में हुईं। जिनमें से केवल दो राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक में ही जरूरतमंदों के लिए शिकायत निवारण प्रणाली है। चार राज्यों में यह प्रणाली नहीं है, और दो राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत जानकारी में जरूरी जानकारी नहीं दी है। दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि जिन राज्यों में मृत्यु दर ज्यादा है, वे ट्रॉमा रजिस्ट्री बनाने में भी पिछड़े हुए हैं, और कई राज्य अभी भी मैन्युअल डेटाबेस के आधार पर काम कर रहे हैं।
आठ राज्य में जरूरतमंदों के लिए शिकायत निवारण प्रणाली
सभी 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल आठ में ही जरूरतमंदों के लिए शिकायत निवारण प्रणाली है जबकि 17 में सडक़ दुर्घटना पीडि़तों के लिए बचाव प्रोटोकॉल है। 22 राज्यों में ट्रॉमा रजिस्ट्री नहीं है और 13 राज्यों में या तो जीपीएस नहीं है या कुछ ही एम्बुलेंस में जीपीएस है, वो भी केवल सरकारी एम्बुलेंस में। इन आठ राज्यों में से सात राज्यों ने दुर्घटनास्थल से पीडि़तों को बचाने के लिए प्रोटोकॉल स्थापित करने के मानदंडों को पूरा किया है। हालांकि, कर्नाटक में सडक़ दुर्घटना पीडि़तों को दुर्घटनास्थल से अस्पताल तक चिकित्सा और गैर-चिकित्सा बचाव और रिफर के लिए कोई बचाव प्रोटोकॉल नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *