निराशा और घृणा की वजह से छोड़ी आप : राघव चड्ढा

नई दिल्ली

आम आदमी पार्टी छोडक़र बीजेपी में जाने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने किसी डर नहीं बल्कि बढ़ती घृणा के चलते आप छोड़ी है। उन्होंने कहा “जो लोग कह रहे हैं कि हमने डर के मारे पार्टी छोड़ी, हमने डर के मारे नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी से निराश होकर पार्टी छोड़ी। हम आम आदमी पार्टी से पूरी तरह से तंग आ चुके थे।”
राघव चड्ढा ने दावा किया कि जिस पार्टी को बनाने में उन्होंने कभी मदद की थी, उसमें अब “ईमानदार, मेहनती” सदस्यों के लिए कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने कहा, “हर सच्चा देशभक्त जिसने अपने खून-पसीने से आम आदमी पार्टी को सींचा है, या तो पार्टी छोड़ चुका है या छोड़ रहा है।” राघव चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी अब एक गलत रास्ते पर चल रही है जिससे कोई भी जुडऩा नहीं चाहता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नेतृत्व अपने संस्थापक मूल्यों और सिद्धांतों से भटक गया है। राघव चड्ढा ने कहा कि कई सांसदों ने एक साथ पार्टी छोडऩे का फैसला किया क्योंकि उनका मानना था कि पार्टी भ्रष्ट और समझौतावादी हाथों में पड़ गई थी। उन्होंने कहा “एक नहीं दो नहीं बल्कि सात सांसद एक साथ आम आदमी पार्टी छोड़ रहे हैं।” उन्होंने संविधान के उन प्रावधानों का हवाला दिया जो निर्वाचित प्रतिनिधियों को किसी पार्टी को छोडऩे की अनुमति देते हैं यदि उन्हें लगता है कि वह अपने निर्धारित मार्ग से भटक गई है
हम नहीं केजरीवाल हैं गद्दार :स्वाति मालीवाल
बीजेपी ज्वाइन करने के बाद स्वाति मालीवाल ने कहा कि अगर आज के समय में कोई गद्दार है, तो वह अरविंद केजरीवाल हैं। उन्होंने बताया “जब अरविंद केजरीवाल ने आंदोलन शुरू किया था तब वह 2 रुपये की पेन लेते थे, फटी हुई शर्ट पहनते थे, खटारा गाड़ी में घूमते थे। यह सब देखकर हम बहुत प्रेरित होते हैं, देश के लोग भी उनसे काफी प्रभावित हुए। लेकिन जैसे ही उनके पास सत्ता आई, उन्होंने तुरंत अपने लिए 100 करोड़ का घर बनवा लिया।” 2006 से मैं अरविंद केजरीवाल के साथ काम कर रही हूं और हर आंदोलन में उनका साथ दिया है। लेकिन अरविंद केजरीवाल ने मुझे मेरे ही घर में एक गुंडे से पिटवाया। जब मैंने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो मुझे धमकाया गया। पार्टी ने मुझे दो साल तक संसद में बोलने का कोई मौका नहीं दिया, यह बहुत शर्मनाक है। अरविंद केजरीवाल महिला विरोधी हैं।”अरविंद केजरीवाल करप्शन और गुंडागर्दी के लिए जाने जाते हैं।”
स्वार्थ के लिए राजनीतिक दल बदलना उचित नहीं: अन्ना हजारे
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि एक पार्टी छोडक़र दूसरी पार्टी में शामिल होना सही नहीं है अपने स्वार्थ के लिए राजनीतिक दल बदलना उचित नहीं है। हमारे संविधान में इसका कोई उल्लेख नहीं है। हमारा संविधान सर्वोपरि है। हमारा देश संविधान के आधार पर ही चलता है।

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