2024 के बाद से एलओसी पर हालात काफी हद तक स्थिर
नई दिल्ली : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए एलओसी का स्थिर होना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमा पर किसी भी तरह की गड़बड़ी के नतीजे भुगतने होंगे। उन्होंने कहा ‘हम चीन से यही कहते हैं अगर आप सामान्य रिश्ते चाहते हैं, अगर बाकी रिश्ते आगे बढऩे हैं तो यह सामान्य समझ की बात है। यह साफ है कि सीमा स्थिर होनी चाहिए और हमें सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता की जरूरत है।’
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि 2024 के बाद से एलओसी पर हालात काफी हद तक स्थिर हो गए हैं और रिश्ते उसी हिसाब से सामान्य होने की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में, दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में साढ़े चार साल से ज्यादा समय तक चले मिलिट्री गतिरोध से बिगड़े रिश्तों को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। यह गतिरोध 2024 के आखिर में खत्म हुआ। उन्होंने कहा ‘चीन के साथ हमारे बहुत बड़े आर्थिक मुद्दे भी हैं। उन्होंने कहा ‘आज हमारा मानना है कि हमें चीन में वैसा समान अवसर नहीं मिल रहा है जैसा हमने उन्हें दिया है।’ उन्होंने कहा ‘1975 से 2020 तक पूरे 45 वर्षों तक उस सीमा पर कोई खून नहीं बहा। पिछली बार मौतें 1975 में हुई थीं। इस दौरान भारत-चीन संबंध बेहतर हुए।’ उन्होंने कहा ‘फिर 2020 में जब हम कोविड लॉकडाउन के दौर से गुजर रहे थे तब सीमा पर कई विवाद हुए और मामला एक ऐसी झड़प तक पहुंच गया जिसमें दोनों तरफ के कई सैनिक मारे गए।’उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए, यह 1975 से चली आ रही स्थिति से एक बहुत बड़ा बदलाव था। अगर सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता भंग होती है, तो रिश्तों पर इसका असर पड़ेगा।’ जयशंकर ने कहा कि शांति और स्थिरता बहाल होने तक, अगले कुछ वर्षों में इसके नतीजे साफ तौर पर दिखाई दिए।
