27 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सभी ट्रेन यात्रियों को बीमा सुरक्षा देने का आदेश दिया है। भारतीय रेलवे को निर्देश दिया है कि 27 अक्टूबर से काउंटर पर खरीदे जाने वाले टिकटों पर भी इंश्योरेंस की सुविधा दी जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि इस आदेश को लागू करने में कोई भी चूक होने पर रेलवे बोर्ड को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि उसे इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि कवच सुरक्षा प्रणाली का विस्तार करने, फुट ओवरब्रिज बनाने और रेलवे पटरियों के आसपास बाड़ लगाने के काम को प्राथमिकता देने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट के पहले के आदेशों के बाद इन कामों पर कितना ध्यान दिया गया, इसकी जानकारी भी नहीं दी गई। कोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया कि वह दो महीने के भीतर इन तीनों मुद्दों पर किए गए विशेष प्रयासों की जानकारी दे। साथ ही इन परियोजनाओं के लिए बजट और वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था का ब्योरा भी पेश करे। कोर्ट ने रेलवे से यह भी कहा कि वह जमीनी स्तर पर हुए वास्तविक काम की जानकारी रिकॉर्ड पर रखे। सुप्रीम कोर्ट ने रेल मंत्रालय के अधिकारियों के रवैये पर बेहद निराशा और नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि यह आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर मामला है। पीठ ने कहा “रेलवे इस कोर्ट के सामने लगातार कहता रहा है कि इस दिशा में सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि ये आश्वासन ज्यादातर कागजों तक ही सीमित रहे हैं और जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। आम लोगों की सुरक्षा और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तय किए गए क्षेत्रों में बजट का पूरा इस्तेमाल भी नहीं किया गया है।” कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर उसे लगा कि रेलवे जमीनी स्तर पर काम किए बिना केवल आश्वासन दे रहा है तो वह इस मामले को गंभीरता से लेगा। पीठ ने कहा “हम इस बात को लेकर खास तौर पर चिंतित हैं कि बजट में प्रावधान किए जाने के बावजूद सुरक्षा से जुड़ी बुनियादी जरूरतों को भी पर्याप्त रूप से पूरा नहीं किया गया है। बजट में तय की गई राशि का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल नहीं हुआ है।”
मतगणना का वीडियो गायब होने पर चुनाव आयोग को फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग के इस दावे पर कड़ी आपत्ति जताई कि वह कर्नाटक के श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र में 2023 में हुई वोटों की गिनती की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं ढूंढ पाया है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर आयोग उपलब्ध रिकॉर्ड पेश करने में नाकाम रहता है तो उसके खिलाफ़ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जाएगा। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने कहा कि भारत का चुनाव आयोग यह कैसे कह सकता है कि उसने अपना रिकॉर्ड खो दिया है? आपका मुख्य काम चुनाव कराना है और आपके पास डॉक्यूमेंट होने ही चाहिए। यह कहने का क्या मतलब है कि ‘हां हम उसे खोजने की कोशिश कर रहे हैं’? आपने उसे चुने हुए उम्मीदवार को दे दिया था। रिकॉर्ड की कोई कस्टडी ही नहीं है। आपके पास जो कुछ भी है, उसे अगली तारीख पर पेश करें। वरना हमें आपके खिलाफ़ प्रतिकूल निष्कर्ष निकालना पड़ेगा। हम इस तरह के कमजोर बहाने स्वीकार नहीं करेंगे।

