यत्र तत्र सर्वत्र
LIVE

नागरिकों को नियमों के तहत विरोध करने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

आवाजाही और इंटरनेट सेवाएं रोकी नहीं जानी चाहिए
नई दिल्ली : दिल्ली में प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकों को नियमों के तहत विरोध करने का अधिकार है। अदालत ने निर्देश दिया कि लोगों की आवाजाही और इंटरनेट सेवाएं रोकी नहीं जानी चाहिए तथा मेट्रो का संचालन पूरी तरह बंद न किया जाए। विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई के दौरान कई अहम निर्देश जारी किए। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने वाले लोगों को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। अदालत ने मेट्रो और रेलवे सेवाओं को सामान्य करने, इंटरनेट बहाल रखने तथा नागरिकों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं से संबंधित आदेशों के कथित उल्लंघन को लेकर दायर अवमानना याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस भी जारी किया। अदालत ने कहा कि मौलिक अधिकारों की रक्षा करना सुप्रीम कोर्ट का संवैधानिक दायित्व है। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का प्रस्ताव था, लेकिन अदालत के आदेश के बाद यह संख्या 47 रह गई। पीठ ने अधिकारियों से इन सभी 47 स्टेशनों की स्थिति स्पष्ट करने और जवाब के साथ नक्शा दाखिल करने को कहा। अदालत ने कहा कि मेट्रो सेवाएं सामान्य समय-सारणी के अनुसार चलती रहनी चाहिए। हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून के तहत लागू शर्तें प्रभावी रह सकती हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि मेट्रो और ट्रेनों को नियंत्रित तरीके से चलाया जा सकता है, लेकिन उनका संचालन पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि लोगों को विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए पुलिस के बनाए नियमों का पालन करना होगा। अदालत ने कहा विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है, इस पर कोई विवाद नहीं है। लेकिन प्रदर्शन करने का तरीका पुलिस एक्ट के दायरे में होना चाहिए। आप यह नहीं कह सकते कि प्रदर्शन करने का आपका अधिकार पुलिस एक्ट से ऊपर है।” कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बैरिकेड लगाने की जरूरत की दोबारा जांच की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *