मानसून सत्र में सरकार पेश करेगी पांच नए विधेयक


वंदे मातरम’ के अपमान पर जेल की सजा का प्रावधान
नई दिल्ली:केंद्र सरकार सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में पांच नए विधेयक पेश करने जा रही है। इनमें आयकर और एमएसएमई सुधार, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने और जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून में बदलाव से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026’ को सदन में पेश करेंगे। यह विधेयक राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन करेगा। मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का अपमान करना अपराध है, जिसके लिए तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है। प्रस्तावित संशोधन के तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति ‘वंदे मातरम्’ के गायन में बाधा डालता है या किसी भी रूप में उसका अपमान करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
आयकर संशोधन विधेयक 2026 का उद्देश्य पहले जारी अध्यादेश का स्थान लेना है। इसे भारत के सॉवरेन डेट मार्केट को मजबूत करने, वैश्विक पूंजी निवेश आकर्षित करने और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तथा आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बीच बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए पेश किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक 2026 के जरिए भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोडक़र सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे में मदद करना है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और भरोसे पर आधारित नियामकीय व्यवस्था को बढ़ावा देना, भुगतान में देरी से जुड़े मामलों के समाधान की व्यवस्था को मजबूत करना तथा राज्यों को अधिक अधिकार देना है। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026 के तहत 1969 के मूल कानून की धारा 13(3) में बदलाव कर जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण से जुड़े नियमों को अधिक सख्त और सुव्यवस्थित बनाया जाएगा। राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य 1971 के कानून में संशोधन कर राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान या राष्ट्रीय सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों के खिलाफ अधिक कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करना है। विधायी कार्यों के अलावा सरकार वर्ष 2022-23 के अनुपूरक अनुदानों की मांग भी संसद में चर्चा और मतदान के लिए पेश करेगी। 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।

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