भारतीय चेतना का वैश्विक प्रकाश स्तंभ रहा है बंगाल’
कोलकाता : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय पुस्तकालय में नव-निर्मित शब्द संग्रहालय के पहले चरण का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्र की संस्कृति के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने के संकल्प में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित कर रहे हैं। गृह मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि किसी भी राष्ट्र या क्षेत्र की संस्कृति और उसकी अभिव्यक्ति भाषा के बिना संभव नहीं है, और भाषा स्वयं भावनाओं से जन्में शब्दों के बिना अस्तित्व में नहीं रह सकती।
अमित शाह ने कहा कि जब तक हमारी भावी पीढिय़ां इस यात्रा को नहीं समझेंगी, तब तक देश का सांस्कृतिक पुनरुद्धार वास्तव में नहीं हो सकता। केंद्रीय गृह मंत्री ने भारत की सांस्कृतिक चेतना के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ”बंगाल हमेशा से भारतीय चेतना का वैश्विक प्रकाश स्तंभ रहा है। एक लंबा दौर ऐसा भी आया, जब भारतीय सांस्कृतिक चेतना को बंगाल से अलग करने की कोशिश की गई। संकीर्ण और विदेशी विचारधाराओं ने बंगाल की देश और दुनिया को दिशा देने की क्षमता को कमजोर किया।” अमित शाह ने कहा, ”अब समय आ गया है कि भारतीय चेतना का यह महान केंद्र फिर से अपनी पूरी शक्ति के साथ दुनिया की चेतना को जागृत करने वाला बने। पुस्तकालयों का जिक्र करते हुए शाह ने कहा “इस देश का भविष्य इस बात पर निर्भर नहीं करता कि उसके कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में कितनी भीड़ है, बल्कि इस पर निर्भर करता है कि कितने युवा और किशोर पुस्तकालयों तक पहुंचते हैं। संस्कृति मंत्रालय की ओर से शुरू किए गए पुस्तकालय आंदोलन के बारे में जरूर जानिए और इसका उपयोग अपने व्यक्तित्व के निर्माण के लिए कीजिए।”भाषा के महत्व पर शाह ने कहा “हर व्यक्ति का अपनी मातृभाषा से लगाव होना स्वाभाविक है। यहां आकर यह महसूस होता है कि यह लगाव केवल भावना तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमारे चरित्र का हिस्सा बनना चाहिए। भारतीय होने के नाते हम अपनी पारंपरिक वेशभूषा भले ही भूल गए हों, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम अपनी भाषा न खो दें। जो लोग भाषा को वैज्ञानिक दृष्टि से देखते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि भाषा एक ऐसा विज्ञान है, जो आवश्यकता और स्वाभाविक विकास के आधार पर विकसित हुआ है।”
हमने कभी भी विचारों पर प्रतिबंध नहीं लगाया
अमित शाह ने कहा “हमने कभी भी विचारों पर प्रतिबंध नहीं लगाया। हमने शास्त्रों के साथ संवाद किया, दार्शनिक बहसें कीं और परंपरा के साथ-साथ नवाचार को भी लगातार अपनाया। उन्होंने कहा “मैं संस्कृति सचिव से आग्रह करता हूं कि इस यात्रा को कंप्यूटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र तक भी आगे बढ़ाया जाए ताकि हमारी भाषाओं को आधुनिक युग में पूरा स्थान मिल सके। हमने कभी नवाचार से दूरी नहीं बनाई। हमने जो भी शुभ और उपयोगी लगा, उसे अपनी परंपरा के साथ जोडक़र उसके सकारात्मक प्रभाव को कई गुना बढ़ाया।”
भाषा और संस्कृति किसी भी राष्ट्र की पहचान का मूल आधार :अमित शाह