सैनिक ही करेंगे युद्ध का फैसला
कोलकाता। पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कोलकाता और पूर्वोत्तर को रक्षा निर्माण का नया हब बनाने की वकालत की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक के बावजूद युद्ध में सैनिक की भूमिका सर्वोच्च रहेगी और सेना को भविष्य के लिए साइबर व स्पेस जैसे नए डोमेन में खुद को पूरी तरह बदलना होगा।
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा है कि तकनीक चाहे जितनी उन्नत हो जाए, युद्ध का अंतिम फैसला मैदान में लडऩे वाला सैनिक ही करता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कोलकाता और पूर्वोत्तर क्षेत्र में बड़े रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने की अपार संभावना है। जनरल पांडे ने कहा कि भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूर्वी भारत की क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना होगा। पूर्व सेना प्रमुख सेवानिवृत्त जनरल पांडे ने कहा कि हाल के वर्षों में ड्रोन, सटीक निशाना लगाने वाले हथियार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बाद यह धारणा बनी है कि पारंपरिक युद्ध का दौर खत्म हो रहा है। उन्होंने इस सोच को गलत बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक युद्ध की ताकत जरूर बढ़ाती है, लेकिन वह केवल एक सहायक है। किसी भी युद्ध का परिणाम अकेले तकनीक तय नहीं करती। अंतिम निर्णय हमेशा सैनिक के साहस, प्रशिक्षण और नेतृत्व पर निर्भर करता है।
सैनिक की भूमिका कभी खत्म नहीं होगी: पूर्व सेना प्रमुख