अदालतों पर बढ़ते मामलों का दबाव है: सीजेआई

तेज़ी से भर्ती और बेहतर सुविधाओं की ज़रूरत है
नई दिल्ली :भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने जि़ला अदालतों में न्यायिक बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने और और ज़्यादा न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, ताकि समय पर न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि अदालतों पर बढ़ते मामलों का दबाव है और इसके लिए और ज़्यादा कोर्टरूम, तेज़ी से भर्ती और बेहतर सुविधाओं की ज़रूरत है। कांत ने पंजाब और हरियाणा सरकारों से सब-डिविजऩल और जि़ला अदालतों में बुनियादी ढांचे को अपडेट और विकसित करने के लिए ज़रूरी फ़ैसले लेने का आग्रह किया।
कांत ने कहा कि हर साल भर्ती करने के बावजूद, हम सभी पद नहीं भर पाते हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि अगर हम ज्यूडिशियल अधिकारियों को नियुक्त करते हैं, तो क्या उनके लिए ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है? अगर कोर्टरूम ही नहीं होंगे, तो ज्यूडिशियल अधिकारी की नियुक्ति का क्या फायदा? उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में 2024 में लगभग 75,000 मामले दर्ज किए गए थे। 2025 में यह संख्या बढक़र लगभग 80,000-83,000 हो गई। इस साल, हमें लगता है कि यह संख्या एक लाख को पार कर जाएगी। सीजेआई ने कहा कि देश में केसों के पेंडिंग होने को लेकर एक धारणा बनी हुई है, लेकिन इस मुद्दे को सही ढंग से समझने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि वह इस दावे को नहीं मानते कि पेंडिंग केसों की संख्या एक करोड़ है। उनके मुताबिक, जैसे ही कोई केस फ़ाइल होता है, उसे गिनती में शामिल कर लिया जाता है, लेकिन प्रक्रियात्मक ज़रूरतों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने की वजह से उसका फ़ैसला उसी दिन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि फ़ैसला सुनाने से पहले नोटिस जारी करने, दलीलें पूरी करने, सिविल मुकदमों में मुद्दे तय करने और दोनों पक्षों को सबूत पेश करने का मौका देने जैसी प्रक्रियाएँ पूरी करनी होती हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ तक प्रक्रियात्मक ज़रूरतों की बात है, मैं उस केस को बकाया नहीं मानता। केस पेंडिंग हो सकता है, लेकिन इसके पीछे एक वाजिब वजह होती है क्योंकि उस मामले में कानून में बताई गई प्रक्रिया का पालन किया जा रहा होता है।

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