बार के युवा सदस्यों को बढ़ावा देना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट


नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और दूसरों से कानूनी पेशों की एक राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री बनाने की मांग वाली याचिका पर जवाब मांगा. इसमें हर नामांकित वकील के लिए एक यूनिक राष्ट्रीय अधिवक्ता भी शामिल होना चाहिए, ताकि नकली प्रैक्टिस करने वालों पर रोक लगाई जा सके. यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी मोहना की पीठ के सामने आया.
पीठ ने कहा कि यह आइडिया इनोवेटिव लगता है और इसे टेक्नोलॉजी की मदद से लागू किया जा सकता है. सुनवाई के दौरान सीजेआई ने बार के युवा सदस्यों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें बढ़ावा देना चाहिए और बार के युवा सदस्यों को मजबूत करना सबसे अच्छा तरीका है. पीठ ने कहा कि उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कुछ बुरे कमेंट्स देखने को मिले हैं. सीजेआई ने कहा “हम इनमें से कुछ सैंपल दिखाएंगे. किस तरह के घटिया कमेंट्स और बयान दिए जा रहे हैं, और हमें यकीन है कि उनका कानून से कोई लेना-देना नहीं है.” पीठ ने कहा वकील यह सब नहीं करेंगे. जो लोग ऐसा कर रहे हैं और पेशे को बदनाम कर रहे हैं, वे शायद असल में पेशेवर नहीं हैं.” सीजेआई ने बताया कि कुछ हाई कोर्ट और कुछ जिला कोर्ट में भी बार के युवा सदस्यों ने एसोसिएशन बनाई हैं. उन्होंने कहा कि वे रचनात्मक शैक्षणिक गतिविधियां और कानूनी मुद्दों पर चर्चा में शामिल थे. पीठ ने यह भी कहा कि इस मामले में लॉ यूनिवर्सिटी को भी पार्टी बनाया जाना चाहिए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *