मुख्यमंत्री ने दी निगम-मंडल अध्यक्षों को नसीहत, अपने सहयोगी सोच-समझकर रखना : डॉ. यादव


ट्रांसपेरेंसी जरूरी, अपनी गरिमा का ध्यान रखें
काम को पहले समझें, टीम से बेहतर समन्वय करें
जनता के हित में नतीजे दें, संसाधनों का करें समुचित उपयोग
काम से बनाये अपनी पहचान
स्व-अनुशासन में रहें, निगम मंडल में अनुशासन के लिये नियमित मॉनिटरिंग करें
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निगम, मंडल, प्राधिकरणों और आयोग के नवनियुक्त नए पदाधिकारियों से कहा “आपकी भाषा में सौम्यता और निर्णय में दृढ़ता होनी चाहिए.” डॉ. यादव ने कहा “सभी पदाधिकारी पूरी गरिमा से अपने दायित्वों को अंजाम दें. सोच-विचार कर ही अपने सहयोगी रखें. हमें अनावश्यक प्रचार और अनावश्यक चीजों से भी बचना है. कदाचार पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है. इसीलिए अपने संस्थान में किसी भी प्रकार के कदाचार को कतई बर्दाश्त न करें. ऐसे काम और ऐसे लोगों से भी दूरी बनाकर रखें, जिनसे आपकी गरिमा को ठेस पहुंच सकती है. जनहित आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए.”मुख्यमंत्री अटल बिहारी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में प्रदेश के विभिन्न निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग एवं प्राधिकरणों के नवनियुक्त पदाधिकारियों के उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा “हजारों कार्यकर्ताओं में से आपका चुनाव किया गया है. इसलिए आपको समझना होगा कि आप कितने महत्वपूर्ण हैं. आपको घर से लाकर जिम्मेदारी दी है. इसलिए ऐसा काम करें आपकी धाक बने, सरकार की साख बने. सभी नवनियुक्त पदाधिकारी पूरी प्रशासनिक दक्षता, पूर्ण क्षमता, निष्ठा और सेवा भावना से काम करें. आप सब सरकार का अभिन्न अंग हैं. आपके काम से ही सरकार की समाज और नागरिकों में साख बनेगी. इसीलिए पहले अपने काम को अच्छी तरह से समझें, विभागीय नीतियों और नियमों का समुचित अध्ययन करें. अपने उपलब्ध संसाधनों का उत्कृष्ट नियोजन करें और बेहतर तालमेल एवं सामंजस्य से अपने कार्य दायित्व को अंजाम दें.” मुख्यमंत्री ने कहा “वर्तमान में तकनीक का इस्तेमाल सुशासन का बड़ा आधार बन चुका है. हमें अपने कामकाज में डिजिटल गवर्नेंस, डाटा आधारित निर्णय, तकनीक संचालित निगरानी और सेवा वितरण की पारदर्शी व्यवस्था की दिशा में आगे बढऩा है. इसीलिए सभी पदाधिकारी अपने-अपने कार्य-अधिकार क्षेत्र में डिजिटल प्रणालियों का अधिकतम उपयोग करें. सोशल मीडिया से जुड़ें और सरकार की उपलब्धियों में सहभागी बनें.डॉ. यादव ने कहा कि निगम-मंडल-बोर्ड की कार्यप्रणाली का अध्ययन खूब करें। योजनाएं बनाते समय सरकार की नीतियों और संकल्प पत्र का ख्याल रखें। डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को विकसित और भारत का सबसे बेहतरीन राज्य बनाना है।”
राजनीतिक जीवन में नैतिकता और शुचिता बेहद जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा अनेकता में एकता ही हमारी ताकत है। हम योग्यता का सम्मान करना जानते है इसीलिए योग्यता के आधार पर सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। डॉ. यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का उद्धरण दोहराते हुए कहा कि राजनीति और प्रशासन का एकमात्र ध्येय जनकल्याण होना चाहिए। राजनीतिक जीवन में नैतिकता और शुचिता बेहद जरूरी है। हमें स्व. वाजपेयी के आदर्शो पर चल कर देश और प्रदेश की सेवा करनी है। डॉ. यादव ने कहा कि सेवा ही हमारा परम धर्म है। हमें परमेश्वर ने जनसेवा का अवसर दिया है इसीलिए सभी नवनियुक्त पदाधिकारी पूरी प्रशासनिक दक्षता, पूर्ण क्षमता, निष्ठा और सेवा भावना से काम करें। अपने उपलब्ध संसाधनों का उत्कृष्ट नियोजन करें और बेहतर तालमेल एवं सामंजस्य से अपने दायित्व का निर्वहन करें।
आय के नये स्रोत सृजित करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होती है। इसके लिए वित्तीय अनुशासन लाना, फिजूल खर्ची पर अंकुश लगाना और नवाचारों से आय के नए स्रोत सृजित करना जरूरी है। नवनियुक्त पदाधिकारी संस्थान के अधिकारियों के साथ टीम भावना से काम करें और निगम मंडल में अनुशासन के लिये स्व-अनुशासन में रहें और नियमित मॉनिटरिंग करें। डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजनरी नेतृत्व में हम सबको नागरिकों की सेवा करते हुए प्रदेश को विकसित और भारत का सबसे बेहतर राज्य बनाने का अवसर प्राप्त हुआ है। निगम, मंडल, बोर्ड और आयोग के कामकाज में पारदर्शिता और दृढ़ता लाकर अपने संस्थान और प्रदेश को आत्मनिर्भर और कार्य कुशल बनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। डॉ. यादव ने कहा कि आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश का सपना तब तक अधूरा है जब तक हम जरूरतमंदों तक आवश्यक सहायता न पहुंचा दे। डॉ. यादव ने कहा कि जनता के हित में नतीजें दे। यही हमारा उद्देश्य और यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
सभी पदाधिकारियो के कार्यों का निरंतर आंकलन किया जायेगा: प्रदेश प्रभारी
प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के विचार और कर्म से सदैव यह परिलक्षित होता है कि वे मध्यप्रदेश को सभी क्षेत्रों में देश में प्रथम स्थान पर रखने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। वर्ष 2003 से किए जा रहे प्रयासों का ही परिणाम है कि प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों के अनुरूप हम राजनीति को प्रोफेशन नहीं मिशन मानते हैं। सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों के आचरण और व्यवहार में यह भाव अभिव्यक्त होना चाहिए। निगम-मंडलों को आत्मनिर्भर बनाना और शुचिता के साथ उनका संचालन सभी पदाधिकारियो का दायित्व है। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारियो के कार्यों का निरंतर आंकलन किया जायेगा।

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