नीति आयोग ने की सिफारिशें
नई दिल्ली
मेयरों को ताकत मिली तो 10 लाख से ज्यादा की आबादी वाले देश के 46 बड़े शहरों का नजारा बदल जाएगा। इससे जलापूर्ति स्वच्छता, कचरा निस्तारण प्रबंध, नगरीय नियोजन, अग्निशमन सेवाएं व बस संचालन जैसी सेवाएं बेहतर तरीके से जनता के बीच पहुंच पाएंगी।
नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सरकार से सिफारिश की है कि सभी राज्यों में अनिवार्य रूप से मेयर का चुनाव पांच साल के कार्यकाल के लिए जनता से कराया जाए। साथ ही मेयर-इन-काउंसिल प्रणाली बनाकर उसे पूरे शहर का हर तरह से विकास करने के लिए सारे अधिकार दिए जाएं। शहर नियोजन, भूमि उपयोग का विनियमन, आर्थिक और सामाजिक विकास की योजना, सडक़ें और पुल जैसे काम नगर निगमों को दिए जाने चाहिए। इसके अलावा राज्य विधानमंडल की निगरानी के बिना शहर सरकार को भंग करने पर रोक लगनी चाहिए। नगर आयुक्त को मेयर के अधीन कर देना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया कि कार्यों का सबसे अधिक विकेंद्रीकरण महाराष्ट्र और गुजरात में है। यहां शहर की सरकारें जल आपूर्ति, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और बस सेवाएं का नियंत्रण करती हैं। दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरलम, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई शहरों में बस सेवाओं और शहरी नियोजन कार्य अब भी नगर निगमों के बजाय राज्य के नियंत्रण में हैं। मजबूत और जवाबदेह शहर-स्तरीय शासन के लिए सशक्त मेयर-इन-काउंसिल प्रणाली लागू करना जरूरी है।
मेयर-इन-काउंसिल प्रणाली बनाने की जरूरत
नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि राज्य सरकारें नगरपालिका कानूनों में संशोधन कर मेयर-इन-काउंसिल को नगर निगम का सर्वोच्च कार्यकारी निकाय घोषित करें और उसकी भूमिकाएं स्पष्ट करें। इस व्यवस्था में शहरी नियोजन, सेवा वितरण, वित्त और मानव संसाधन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कार्यकारी अधिकार महापौर और चयनित पार्षदों द्वारा सामूहिक रूप से प्रयोग किए जाएंगे। मेयर-इन-काउंसिल के भीतर पोर्टफोलियो-आधारित प्रणाली लागू की जाए, जिसमें प्रत्येक सदस्य को एक विशिष्ट विभाग की जिम्मेदारी दी जाए। मेयर को ही अधिकार होना चाहिए कि वह विभागों के प्रमुखों की नियुक्ति करे।