मप्र अपनी सांस्कृतिक विरासत को दे रहा नई ऊर्जा : डॉ. यादव

मुख्यमंत्री ने राजा हिरदेशाह लोधी की पुण्यतिथि कार्यक्रम को किया संबोधित
राजा हिरदेशाह के संघर्ष और शौर्य को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा
भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नई ऊर्जा दे रहा है। राजा हिरदेशाह लोधी ने अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ सबसे पहले संगठित विद्रोह किया। राजा हिरदेशाह को नर्मदा टाइगर के नाम से भी जाना जाता है। वे 1842 की क्रांति के महानायक थे, जिनकी शौर्य गाथा आज भी बुंदेला, लोधी और जनजातीय समाज के नाटकों, लोक गीतों और लाखों-लाख हृदय में जीवित है। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी और आदर्श है। समाज के महापुरुषों के संघर्ष को भी याद करने की आवश्यकता है। जो संघर्षों से लडऩा जानता है, समाज उसका अभिनंदन करता है। इतिहास के गौरवशाली पृष्ठ पुन: खुलने चाहिए। राज्य शासन राजा हिरदेशाह के संघर्ष और देश की आजादी में उनके योगदान पर शोध कराएगी। राजा हिरदेशाह के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने 1842 की क्रांति के महानायक राजा हिरदेशाह लोधी की स्मृति में जंबूरी मैदान पर हुए ऐतिहासिक आयोजन और शौर्य यात्रा को संबोधित किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोधी समाज वीरता और?किसान योद्धा परंपरा का प्रतीक है। अंग्रेजों की बढ़ती दखलअंदाजी, करों के भारी बोझ और किसानों के शोषण ने राजा हिरदेशाह को विद्रोह के लिए प्रेरित किया। राजा हिरदेशाह की कहानी केवल युद्ध की नहीं, बल्कि एकता, साहस और देशभक्ति की गाथा है। आज के युवाओं के लिए उनका स्पष्ट संदेश है कि अत्याचार के खिलाफ खड़े होना, हर भारतीय का कर्तव्य है। राज्य सरकार प्रदेश की विरासत और महान हस्तियों के सम्मान में निरंतर गतिविधियां संचालित कर रही है। रानी अवंतीबाई के नाम पर सागर में राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। राज्य सरकार द्वारा सनातन संस्कृति के सभी तीज-त्यौहार धूमधाम से मनाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए कृषक कल्याण वर्ष मनाने की पहल की है। महान सम्राट विक्रमादित्य पर भी शोध संस्थान बनाया गया है। प्रदेश सरकार सांस्कृतिक पुनरोत्थान के लिए संकल्पित है। इसीलिए प्रत्येक नगरीय निकाय में सर्व सुविधायुक्त भव्य गीता भवन बनाए जा रहे हैं। सभी जनपदों में एक-एक वृंदावन ग्राम भी तैयार किए जा रहे हैं।
नर्मदा के तट से आजादी की क्रांति का पहला बिगुल फूंका गया था
दादा गुरु ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में पहली क्रांति नर्मदा के तट पर 1842 में शुरू हुई थी, यह तथ्य हम सबको गौरवान्वित करने वाला है। राजा हिरदेशाह ने इसका नेतृत्व किया और अपना बलिदान दिया। इस आयोजन में जहां धैर्य है वहीं धर्म भी है। शौर्य दिवस के अवसर पर हमें सनातन धर्म के मार्ग पर चलते हुए अखंड भारत के निर्माण में योगदान का संकल्प लेना है। राजा हिरदेशाह ने बुंदेलों, जनजातियों और सकल समाज को एकजुट कर राष्ट्र के लिए लडऩे को तैयार किया था। नर्मदा के तट से आजादी की क्रांति का पहला बिगुल फूंका गया था। प्रदेश में रानी अवंतीबाई, वीरांगना दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं ने अपने राज्य की रक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था।
समाज के युवाओं को संस्कारवान बनने की आवश्यकता :पंचायत मंत्री
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि सामाजिक जीवन में शिक्षित होने के साथ संस्कारित बनने का संकल्प भी लेना चाहिए। राजा हिरदेशाह ने 1842 से 1858 तक लगातार ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। आज राजा मेहरबान सिंह को भी याद करने का अवसर है, जिन्होंने कभी कोई लड़ाई नहीं हारी। यह आयोजन ऐसे वीरों के बलिदान को याद करने के लिए है। उनके परिवारों का सम्मान करने का दिन है। लोधी समाज सामर्थ्यवान हैं, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लिया, प्रश्न यह है कि वो पिछड़े कैसे हो गए। समाज के युवाओं को साहसी, सामर्थ्यवान, शिक्षित और संस्कारवान बनने की आवश्यकता है।

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