बाल विवाह कराने पर होगी दो वर्ष की सजा और एक लाख का जुर्माना

रीवा 
 महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अक्षय तृतीया के अवसर पर होने वाले बाल विवाहों की रोकथाम के लिए जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। आगामी 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया एवं अन्य विवाह मुहूर्तों पर होने वाले आयोजनों पर प्रशासन की पैनी नजर है और बाल विवाह की पहचान कर उसे रोकने के लिए पूरी तरह अलर्ट पर है। कानूनन 18 वर्ष से कम आयु की बालिका और 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह करना बाल विवाह की श्रेणी में आता है, जो कि एक अपराध है। बाल विवाह जैसी गंभीर कुरीति को दूर करने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 लागू है, जिसके अंतर्गत बाल विवाह कराना, उसमें सहयोग करना या प्रोत्साहन देना गैरकानूनी है। इस कानून के उल्लंघन पर दोषियों को 2 वर्ष तक का सश्रम कारावास या एक लाख रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों सजाओं का प्रावधान है।

   जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास नयन सिंह ने जिले के प्रबुद्ध नागरिकों, धर्मगुरुओं, गैर-सरकारी संगठनों और विवाह से जुड़े विभिन्न घटकों जैसे विवाह घर संचालकों, बैंडदल, प्रिंटिंग प्रेस, हलवाई और केटरर्स से अपील की है कि वे बाल विवाह न होने देने को प्राथमिकता दें और संभव हो तो विवाह संबंधी कार्य लेने से पूर्व वर-वधू का आयु प्रमाण पत्र अवश्य देख लें। जिले में इस अभियान में मदद करने और बाल विवाह को रोकने के लिए उडऩदस्ता दल का गठन किया गया है, जिसमें अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास, खण्ड चिकित्सा एवं शिक्षा अधिकारी, पुलिस थाना प्रभारी तथा ग्रामीण क्षेत्रों के सचिव शामिल हैं। बाल विवाह की शिकायतों की प्राप्ति और त्वरित रोकथाम के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। नागरिक जिले में होने वाले किसी भी बाल विवाह की सूचना मोबाइल नंबर 9406935085, 9630403767, 9752408448, 8172836084, 9039688479 या चाइल्ड लाइन के टोल फ्री नंबर 1098 पर दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त उडऩदस्ता दल के किसी भी सदस्य को भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिए सभी से सहयोग करने का अनुरोध किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *