तार्किक नतीजे तक पहुंचाएं
रिपोर्ट के बाद दान प्रबंधन पर आ सकते हैं नए निर्देश
नई दिल्ली: राम मंदिर दान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से कहा कि वह जल्द जांच पूरी करे और उसे तार्किक नतीजे तक पहुंचाए। सुप्रीम कोर्ट ने स्ढ्ढञ्ज को मामले की जांच में हुई प्रगति पर स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जमा करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह मामले से जुड़े पक्षकारों के सुझावों पर निष्पक्षता से विचार करे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बाद वह श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान मैनेजमेंट में सुधार के लिए कुछ निर्देश जारी कर सकता है।
पीठ ने एसआईटी से कहा कि जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग याचिकाकर्ताओं की ओर से दिए गए सुझावों पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जाए। कोर्ट ने संकेत दिया कि जांच में किसी भी तरह की कमी न रहे और पूरे मामले की पड़ताल प्रभावी तरीके से आगे बढ़े। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट देखने के बाद वह राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की ओर से दिए जाने वाले दान के प्रबंधन में सुधार के लिए जरूरी निर्देश जारी कर सकता है। यानी कोर्ट की नजर केवल कथित हेराफेरी की जांच पर ही नहीं, बल्कि भविष्य में दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर भी है।
राज्यों द्वारा हाथी गलियारों में बाधाएं खड़ी करना अस्वीकार्य
सर्वोच्च न्यायालय ने वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को देशव्यापी सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है ताकि यह जांच की जा सके कि क्या किसी राज्य ने हाथी गलियारों में बाधाएं या अवरोध पैदा किए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई भी कार्रवाई अस्वीकार्य है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि राज्य हाथियों के रास्ते में बाधाएं नहीं बना सकते, भले ही इसका उद्देश्य फसलों के नुकसान या आजीविका को बचाना हो। पीठ ने कहा “किसी भी प्रकार की बाधा का निर्माण या हाथी गलियारों में अवरोध पैदा करना स्वीकार्य नहीं है। हम स्पष्ट हैं कि वन्यजीवों के रास्ते में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। हाथियों के झुंड लंबी दूरी तय करने के अभ्यस्त होते हैं। कोई भी राज्य यह नहीं कह सकता कि केवल इसलिए कि फसलें नष्ट हो रही हैं, उन्हें उनके रास्ते में बाधाएं बनानी होंगी।”मुख्य न्यायाधीश ने हरियाणा के यमुनानगर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी हाथी हैं और वे वहां से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की ओर जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा “कोई भी राज्य उनके रास्ते को अवरुद्ध नहीं कर सकता।”शीर्ष अदालत ने हाथियों को भगाने के लिए किसी भी प्रकार के आग के गोलों या मशालों के उपयोग पर रोक लगा दी है और राज्य के अधिकारियों से इन निर्देशों को लागू करने को कहा है।
7 दिन में फाइनल करें हवाई किराया नियम
हवाई किराए में मनमानी बढ़ोतरी और यात्रियों से लिए जाने वाले अतिरिक्त चार्ज पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विमानन क्षेत्र के लिए नए नियमों को अंतिम रूप देने का काम तेज कर दिया गया है। सरकार ने इसके लिए तीन हफ्ते का समय मांगा, लेकिन कोर्ट ने कहा इसे सात दिन के भीतर प्रकाशित कीजिए। अगर एयरलाइंस पालन नहीं कर रही हैं तो उन्हें जमीन पर खड़ा कर दीजिए। ।
राम मंदिर दान मामला की एसआईटी जल्द पूरी करे जांच :सुप्रीम कोर्ट