नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में देश की विनिर्माण क्षमता, बुनियादी ढांचे, कृषि, परिवहन और समुद्री क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद इन निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को 62,500 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहने वाली इस योजना के तहत भारत में मोबाइल फोन निर्माण पर 2.25 से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जाएगा। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को और गति देने के लिए सरकार ने सेमिकॉन 2.0 को भी 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लिए भी कैबिनेट ने दो महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को मंजूरी दी। पहली परियोजना के तहत एनएच-19 से वाराणसी रिंग रोड तक गंगा तट के समानांतर 46.04 किलोमीटर लंबे छह लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण 14,447.64 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। वहीं दूसरी परियोजना के अंतर्गत वरुणा नदी के किनारे एनएच-31 से वाराणसी रिंग रोड तक 43.22 किलोमीटर लंबे 6/4 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण 10,998.32 करोड़ रुपये की लागत से होगा।
राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को मंजूरी
कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कैबिनेट ने राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार नई नीति में पारदर्शी लागत निर्धारण, 12 से 16 प्रतिशत तक रिटर्न ऑन इक्विटी तथा विदेशी मुद्रा जोखिम को कम करने जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। इससे प्रत्येक नए संयंत्र पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान है और आयात पर निर्भरता कम होगी। गुजरात के पोरबंदर में लगभग 2,000 एकड़ क्षेत्र में ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित किया जाएगा, जबकि वाडिनार में 1,570 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक जहाज मरम्मत सुविधा स्थापित की जाएगी।
केंद्रीय कैबिनेट ने लिये बड़े फैसले, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को बजटीय प्रावधान के साथ मंजूरी