अनिल मिश्रा को गड़बड़ी के लिए ठहराया जिम्मेदार
अयोध्या । अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान की कथित चोरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप सकती है। सूत्रों के मुताबिक जांच में ट्रस्ट के पूर्व जनरल सेक्रेटरी चंपत राय को किसी भी आपराधिक साजिश का दोषी नहीं पाया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में उनकी तरफ से लापरवाही और निगरानी में कमी को खामियों का कारण बताया गया है। सूत्रों ने यह भी बताया कि कथित अनियमितताओं में अपनी भूमिका के लिए डॉ. अनिल मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया गया है।
सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने सिफऱ् व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने के बजाय सिस्टम की कमियों को दूर करने के मकसद से बड़े प्रशासनिक सुधारों की सिफारिश की है। इसकी अहम सिफारिशों में मंदिर के दान प्रबंधन सिस्टम का थर्ड-पार्टी ऑडिट शामिल है, ताकि ज़्यादा पारदर्शिता और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जा सके। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि ट्रस्ट में भविष्य की भर्तियां व्यक्तिगत सिफारिशों के आधार पर नहीं होनी चाहिए। इसके बजाय, नियुक्तियां एक पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से की जानी चाहिए, जिसमें विशिष्ट भूमिकाओं के लिए उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह से योग्यता के आधार पर हो। आंतरिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए,एसआईटी ने कंट्रोल रूम के प्रभारी अधिकारियों और दान-संबंधी कार्यों को संभालने वाले अन्य कर्मचारियों की कड़ी निगरानी का प्रस्ताव दिया है। इसने यह भी सुझाव दिया है कि दान की गिनती में लगे कर्मचारियों को रोटेशन के आधार पर तैनात किया जाना चाहिए ताकि मिलीभगत या अधिकार के दुरुपयोग की संभावना को कम किया जा सके।
एसआईटी ने चंपत राय को दी क्लीन चिट