नई दिल्ली:महिलाओं के मान-सम्मान पर जजों की टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जजों की भी यह कर्तव्य है कि वह कुछ रिसर्च करें। अदालत ने नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी कमेटी की रिपोर्ट को सभी हाई कोर्ट की साइट पर अपलोड करें। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के हालिया फैसले पर गंभीर चिंता जताई। हाई कोर्ट ने कहा था कि महिला की सलवार उतारना और उसका ब्रेस्ट दबाना, बलात्कार की कोशिश नहीं माना जा सकता है
मामलों का संज्ञान लेते हुए सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वील पीठ ने कोर्ट में जजों की संवेदनशीलता की कमी पर चिंता व्यक्त की। पीठ ने जजों की यह जिम्मेदारी है कि वे वह फैसला सुनाने से पहले रिसर्च करें। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान देश की सभी अदालतों के लिए गाइडलाइंस जारी की है। टॉप कोर्ट ने निर्देश दिया कि यौन अपराधों के मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता पर बनी नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी कमेटी की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट और देश की सभी हाई कोर्ट की वेबसाइटों पर अपलोड की जाएं। साथ ही राज्यों को निर्देश दिया कि वह सभी पुलिस स्टेशनों को नियमों का पालन करने के निर्देश जारी करें, ताकि एफआईआर लिखते वक्त और चार्जशीट दाखिल करते समय इन बातों का ध्यान रखा जाए। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जजों का भी कर्तव्य है कि वे कुछ रिसर्च करें। स्टाफ कुछ नहीं कर रहा है।
डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में धीरे-धीरे बढ़ती समस्याएं दिखाई दे रही
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से हताश हुए छात्रों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने इस दौरान निर्देश दिए कि बोर्ड के अधिकारी सुधारात्मक कदम उठाए। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कुछ समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा “छोटे बच्चों में हताशा का स्तर देखिए।”पीठ ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में कुछ व्यवस्थित और धीरे-धीरे बढ़ती समस्याएं दिखाई दे रही हैं। न्यायमूर्ति बागची ने सॉलिसिटर जनरल से कहा,” हम आपकी सहायता चाहते हैं, किसी विरोधी पक्ष के रूप में नहीं। कुछ समस्याएं हैं।”
वारिसों का खास अधिकार खेती की जमीन पर भी लागू होता है
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत परिवार के करीबी सदस्यों को दिए गए खास अधिकार कृषि की जमीन पर भी लागू होंगे. यह फैसला जस्टिस संजय करोल और एन कोटेश्वर सिंह की बेंच ने सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने समझाया कि अगर कोई वारिस अपनी पारिवारिक संपत्ति का हिस्सा बेचना चाहता है, तो सबसे करीबी रिश्तेदारों को इसे खरीदने का पहला मौका मिलता है. भले ही संपत्ति खेती की जमीन हो. इसका मतलब है कि खेती की जमीन को कानून के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता. बेंच ने कहा कि वह ट्रांसफर की औपचारिकता तय नहीं करती है, न ही वह स्थानांतरण लेनदेन के तरीके या शर्तों को विनियमित करती है. उसने कहा कि वह सह वारिस के बाहर निकलने के अधिकार पर उत्तराधिकार-आधारित योग्यता रखती है. यह योग्यता हिंदू सक्सेशन एक्ट द्वारा बनाई गई सक्सेशन स्कीम का एक जरूरी हिस्सा है.
पटना हाई कोर्ट के फैसले पर नाराज सुप्रीम कोर्ट,जज फैसला सुनाने से पहले रिसर्च करें