दान पेटी के पैसे में गड़बड़ी, बैंक खातों में नहीं
चढ़ावे से ?3 करोड़ चोरी हुए
पुणे : अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित चोरी के मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने साफ किया कि वे अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने माना कि निगरानी में कुछ चूक जरूर हुई है, लेकिन खुद को व्यक्तिगत रूप से दोषी नहीं मानते। मीडिया से बातचीत में गिरी महाराज ने कहा कि इस मामले में अब तक जितने लोग गिरफ्तार हुए हैं, वे सभी भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारी हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति और जांच की जिम्मेदारी बैंक की थी। उन्होंने कहा कि बैंक अधिकारियों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए था। उन्होंने दान चोरी की रकम को लेकर कहा कि उनका व्यक्तिगत अनुमान करीब तीन करोड़ रुपये का है, लेकिन यह आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। उन्होंने चल रही एसआईटी जांच और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी पर संतोष जताया।
गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि उनके इस्तीफे की खबरें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। उन्होंने कहा मैं भागने वालों में से नहीं हूं। जब लडऩे का समय होता है, तब मैदान नहीं छोड़ा जाता’। वहीं ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि यह उनका स्वैच्छिक फैसला था। ट्रस्ट के नियमों के अनुसार इस्तीफा देने के बाद उसे स्वीकार माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि चंपत राय की लापरवाही इस स्थिति की एक वजह रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि गड़बड़ी दान पेटियों में जमा नकदी में हुई है, ट्रस्ट के बैंक खातों में जमा पैसे सुरक्षित हैं। दान पेटियों की गिनती और हिसाब-किताब स्थानीय ट्रस्टी देखते हैं, जबकि एसबीआई को इस प्रक्रिया को संभालने की जिम्मेदारी दी गई थी। गोविंद देव गिरी महाराज ने इस घटना को ‘भगवान राम के खिलाफ अपराध’ बताया और कहा कि इससे ट्रस्ट को गहरा दुख हुआ है। उन्होंने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। दान में मिले सोने के गायब होने और 1400 करोड़ रुपये के नुकसान के दावों को उन्होंने पूरी तरह गलत और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने 2,926 कीमती वस्तुओं का रिकॉर्ड मीडिया के सामने रखा है और दानदाताओं को जांच के लिए आमंत्रित किया है। गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि उनका प्रायश्चित इस्तीफा देना नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को दोबारा न होने देना है।
चंपत राय की लापरवाही से हुआ राम मंदिर दान घोटाला : ट्रस्ट कोषाध्यक्ष