जिनके पास फीस नहीं, वे सरकारी कॉलेज चुनें
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी कॉलेजों जैसी फीस लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। ऐसा किया तो निजी मेडिकल कॉलेज बंद हो जाएंगे, जबकि देश को डॉक्टरों की जरूरत है। इस टिप्पणी के साथ शीर्ष अदालत ने राजस्थान के निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस संरचना को चुनौती वाली याचिका पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
जस्टिस बीवी नागरत्ना व जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि स्ववित्तपोषित संस्थानों से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे सरकारी संस्थानों के समान फीस लें। पीठ ने कहा कि कोई व्यक्ति सिर्फ फीस को ज्यादा बताकर इसे बराबर करने की मांग नहीं कर सकता कि 22 वर्षीय याचिकाकर्ता छात्र ने नीट यूजी 2025 परीक्षा दी थी। वह सामान्य वर्ग से था, पर उसके पास ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र था। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि जिन छात्रों के पास भुगतान की क्षमता है, वे फीस दे सकते हैं। वहीं, जो छात्र फीस वहन नहीं कर सकते, वे छात्रवृत्ति, आर्थिक सहायता या सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश जैसे विकल्प अपना सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा स्व-वित्तपोषित संस्थानों का मतलब ही है कि वे अपनी आर्थिक व्यवस्था के आधार पर काम करते हैं। अगर निजी संस्थानों को सरकारी फीस ढांचे पर चलने के लिए बाध्य किया गया, तो चिकित्सा शिक्षा में उनका योगदान खत्म हो जाएगा और वे संस्थान बंद होकर अन्य क्षेत्रों में जा सकते हैं।
निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी फीस के लिए मजबूर नहीं कर सकते :सुप्रीम कोर्ट