सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से रिपोर्ट जारी


देश में 37 करोड़ लोग नशे के आदी
हर साल 9 लाख की मौतें
नशे में डूब रहे 1.60 लाख करोड़
नई दिल्ली: देश के हालात ये हैं कि 147 करोड़ की जनसंख्या में से 37 करोड़ लोग नशे के आदी हैं. देश की अर्थव्यवस्था को भी बिगाड़ रहे हैं. नशे के कारण देश की जीडीपी को सालाना लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होता है. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से हाल ही में “भारत में नशीले पदार्थों के उपयोग की सीमा और पैटर्न पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण” रिपोर्ट जारी की गई है. इसके अनुसार, देश में 37 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी प्रकार का नशा करते हैं. इसमें 10 से 75 वर्ष की आयु के बीच के 16 करोड़ लोग वर्तमान में शराब का सेवन करते हैं. लगभग 3.1 करोड़ लोग गांजे का नशा करते हैं.
1.18 करोड़ लोग वर्तमान में सिडेटिव्स यानी शामक दवाओं का सेवन करते हैं. अनुमान है कि लगभग 8.5 लाख लोग इंजेक्शन के जरिए नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं. संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध कार्यालय के अनुसार 2023 में 15 से 64 वर्ष की आयु के लगभग 31.6 करोड़ लोग शराब और तंबाकू के अलावा अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं. यह आंकड़ा 2013 के आंकड़े से काफी अधिक है. विश्व ड्रग रिपोर्ट’ में भांग को सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला नशीला पदार्थ बताया गया है, जिसका दुनिया भर के करीब 24.4 करोड़ लोग सेवन करते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, शराब के सेवन से दुनियाभर में हर साल 26 लाख लोगों की मौत होती है. इसमें भारत में शराब से होने वाली मौतों का अनुपात काफी अधिक है. इसके अलावा, विभिन्न स्वास्थ्य रिपोर्टों का अनुमान है कि भारत में धूम्रपान, शराब और अन्य नशों के दुष्प्रभावों से कुल मौतों का आंकड़ा सालाना 9 लाख के पार भी हो सकता है. भारत में हर एक लाख लोगों पर शराब से जुड़ी मौतों की संख्या 38.5 है. इसमें पुरुष और महिला दोनों शामिल हैं, जबकि चीन में यह संख्या 16.1 है. भारतीय पुरुषों के लिए यह संख्या तेजी से बढक़र 63.0 हो गई, जबकि चीन में यह 29.6 थी. वहीं भारतीय महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 13.5 है, जबकि चीन में यह 3.3 है. 2024 में ड्रग्स के ओवरडोज से 978 लोगों की मौत हुई, जबकि 2023 में इसी वजह से 654 लोगों की जान गई थी.नशे के कारण देश की जीडीपी को सालाना लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान होता है.
ड्रग्स पर रोजाना 2,000 रुपए खर्च
इंडियन काउंसिल फॉर सोशल साइंस रिसर्च की 2019 में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में की गई एक स्टडी में पाया गया कि नशा करने वाला एक व्यक्ति ड्रग्स पर रोजाना 2,000 रुपए खर्च करता है. यह स्टडी की गई थी. 2022 में जम्मू-कश्मीर प्रशासन के एक सर्वे में पाया गया कि 52,000 से ज्यादा लोग हेरोइन का इस्तेमाल करते हैं. इसके लिए एक व्यक्ति औसतन महीने में लगभग 88,000 रुपए खर्च करता था. अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स के कारण देश को सालाना 1.5 लाख करोड़ रुपए की आर्थिक चपत लगती है. कुल मिलाकर मादक पदार्थ देश को 1.6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचा रहे हैं. जो देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह में एक बड़ा रोड़ा है. भारत में नशा-मुक्ति इलाज का औसत खर्च लगभग 70,000 रुपए आता है.

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