पारंपरिक युद्ध और सैन्य साधनों का महत्व अभी भी बरकरार
नागपुर । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा जिन ज़रूरतों के लिए देश को कभी बाहर देखना पड़ता था, उन्हें अब धीरे-धीरे हमारे अपने देश में हमारे अपने नागरिक ही पूरा कर रहे हैं। मुझे लगता है कि यह ज़रूरी है क्योंकि हम सभी आज दुनिया के हालात देख सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय टकरावों के दौरान ग्लोबल लॉजिस्टिक्स की कमज़ोरी को बताते हुए, रक्षा मंत्री ने स्वदेशीकरण के रणनीतिक महत्व पर ज़ोर दिया।
राजनाथ सिंह ने कहा पारंपरिक युद्ध और उसके तरीके आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने 1947 में थे। उन्होंने जोर दिया कि साल 2047 में भी इनकी अहमियत बनी रहेगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्ध छिडऩे पर सप्लाई चेन टूट सकती है। ऐसी स्थिति में हर देश चाहता है कि जरूरी सामान का निर्माण अपने ही देश में हो। जो राष्ट्र अपनी जरूरतें खुद पूरी करता है, वही आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है। राजनाथ सिंह ने कहा है कि भले ही युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा हो, सीमाएं धुंधली हो रही हों और दुश्मन बिना दिखाई दिए किसी देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन पारंपरिक युद्ध और सैन्य साधनों का महत्व अभी भी बरकरार है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चुनौतियों के बावजूद किसी भी देश की सुरक्षा में मजबूत सैन्य औद्योगिक आधार की भूमिका लंबे समय तक महत्वपूर्ण रहने वाली है। राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाना और सैन्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना भारत की रणनीतिक जरूरत है। उनके मुताबिक मजबूत रक्षा उद्योग ही भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की सबसे बड़ी ताकत बनेगा। उन्होंने कहा कि 2021 में ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के कॉरपोरेटाइजेशन के बाद सरकार का स्पष्ट लक्ष्य था कि नई इकाइयों को पूरी स्वायत्तता दी जाए। उन्होंने कहा कि इन इकाइयों को नवाचार, जोखिम लेने, अनुसंधान और निर्यात के क्षेत्र में आगे बढऩे का अवसर दिया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार चाहती थी कि ये संस्थाएं अपनी क्षमता का विस्तार करें और नई ऊंचाइयों को छुएं। उन्होंने संतोष जताते हुए कहा कि यंत्र इंडिया लिमिटेड उसी दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है। रक्षा मंत्री ने कहा कि देश में रक्षा विनिर्माण को मजबूत बनाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में ऐसी परियोजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि हमारा घरेलू रक्षा उत्पादन सिफऱ् 46,000 करोड़ रुपये था। अगर हम भारत के वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों को देखें तो यह अब बढक़र रिकॉर्ड 1,78,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गया है। 2014 में भारत का रक्षा निर्यात लगभग 1,000 करोड़ रुपये था। इस समय हम लगभग 40,000 करोड़ रुपये के हथियार निर्यात कर रहे हैं, जिन्हें कुशल कारीगरों ने भारत में ही बनाया है।
युद्ध छिड़ते हैं तो सप्लाई व्यवस्था पर असर पड़ता है:रक्षा मंत्री