राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय से स्वास्थ्य रिपोर्ट जारी, देश में दिल के मरीज 7 साल में तीन गुना बढ़े


15 से 29 साल के युवा भी आ रहे चपेट में
शहरी इलाकों में बीमारी की दर ग्रामीण इलाकों की तुलना में अधिक
: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय से जारी पारिवारिक सामाजिक उपभोग स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार देश में संक्रामक बीमारियों में कमी आई है लेकिन दिल की बीमारी, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों में वृद्धि हुई है। पिछले सात साल में देश में हृदय रोग से पीडि़तों की संख्या में करीब तीन गुना की बढ़ोतरी हुई है। यहां तक कि अब 15 से 29 साल के युवा भी दिल की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
एनएसओ की रिपोर्ट के अनुसार, देश में पिछले 15 दिनों के दौरान करीब 13.1 प्रतिशत लोग बीमार पड़े। प्रति एक लाख आबादी पर कुल 15,217 बीमारियों के मामले दर्ज किए गए। इससे यह संकेत मिलता है कि कई लोगों को एक से अधिक स्वास्थ्य समस्याएं थीं। महिलाओं में यह संख्या 17,006 रही, जो पुरुषों के 13,504 मामलों से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार शहरी इलाकों में बीमारी की दर ग्रामीण इलाकों की तुलना में अधिक है। शहरों में लगभग 14.9 प्रतिशत लोग बीमार पड़े, तो ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा लगभग 12.2 प्रतिशत था। महिलाओं में बीमारी की दर 14.4 प्रतिशत थी, जबकि पुरुषों में यह 11.8 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के अनुसार, 0-14 वर्ष की आयु के बच्चों और किशोरों में बीमारियों का सबसे बड़ा हिस्सा संक्रमण और सांस संबंधी समस्याओं का है। इनमें बुखार, खांसी और गले के संक्रमण प्रमुख हैं। 15 से 29 वर्ष की आयु के युवाओं में भी संक्रमण ही प्रमुख बना हुआ है। हालांकि इस आयु वर्ग में मानसिक और पेट संबंधी समस्याओं का हिस्सा काफी बढ़ा है। इस आयु वर्ग के लोगों में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आई हैं। उम्र के हिसाब से 60 साल और उससे अधिक उम्र के लोग ज्यादा बीमार पड़े। इसके बाद 45 से 59 साल के उम्र वालों में करीब 20 से 25 प्रतिशत लोग बीमार पाए गए। वहीं 15 से 29 साल के उम्र के युवा सबसे कम बीमार हुए। इनका आंकड़ा 4 से 5 प्रतिशत ही है। वहीं 0 से 4 साल के छोटे बच्चों में यह आंकड़ा लगभग 9 से 10 प्रतिशत रहा।
बीमारियों में बड़ा हिस्सा दिल संबंधी रोगों का
रिपोर्ट के अनुसार पिछले सात वर्षों में दिल की बीमारियों के मामले करीब तीन गुना बढक़र प्रति एक लाख आबादी पर 3,891 तक पहुंच गए हैं, जबकि वर्ष 2017-18 में यह संख्या 1,333 थी। कुल बीमारियों में इसकी हिस्सेदारी 25.6 प्रतिशत है, जो सभी श्रेणियों में सबसे अधिक है। वहीं संक्रमण से जुड़ी बीमारियों में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2017-18 में प्रति एक लाख आबादी पर संक्रमण संबंधी बीमारियों के 2,547 मामले थे, जो 2025 में घटकर 2,302 रह गए। उम्र बढऩे के साथ हृदय रोगों का खतरा तेजी से बढ़ता है। 4 वर्ष के बच्चों में यह सिर्फ 0.3 फीसदी और 5 से 14 वर्ष में 0.2 प्रतिशत है, पर 30 से 44 वर्ष की आयु में यह बढक़र 15.3 प्रतिशत हो जाता है। 45-59 वर्ष के लोगों में हृदय रोगों की हिस्सेदारी 30.1 फीसदी तक है, जबकि 60 वर्ष से ज्यादा के लोगों में 37.8 प्रतिशत दर्ज की गई।

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