नई दिल्ली :दहेज उत्पीडऩ के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर पति के रिश्तेदारों को परेशान नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश के एक मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सास, ससुर और ननद के खिलाफ दर्ज आपराधिक केस को खारिज कर दिया। अदालत ने यह भी कहा कि कानून का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए और हर मामले में ठोस साक्ष्य जरूरी हैं।
जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि शिकायत दर्ज कराने में छह साल से ज्यादा की देरी हुई, जिससे साक्ष्य कमजोर हो गए। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में समय पर शिकायत करना जरूरी है, क्योंकि देरी से मामले की सच्चाई सामने लाना मुश्किल हो जाता है। यह देरी भी केस को कमजोर करने वाला बड़ा कारण बनी। अदालत ने साफ कहा कि दहेज कानून का इस्तेमाल बदले की भावना से नहीं किया जाना चाहिए। केवल यह कहना कि दहेज मांगा गया या उत्पीडऩ हुआ, पर्याप्त नहीं है जब तक ठोस साक्ष्य न हों। कोर्ट ने एफआईआर, चार्जशीट और चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का असर अन्य वैवाहिक मामलों पर नहीं पड़ेगा।
दहेज मामलों पर अदालत की सख्त टिप्पणी, सामान्य आरोपों पर ससुराल पक्ष को नहीं घसीटा जा सकता