नयी दिल्ली:
भारत अपने अधिकार क्षेत्र का उपयोग अपराध की आय को छिपाने के लिए नहीं होने देगा। ईडी और सीबीआई, इन दोनों जांच एजेंसियों के निदेशकों ने सोमवार को भ्रष्टाचार-विरोधी कानून प्रवर्तन प्राधिकरणों के वैश्विक परिचालन नेटवर्क की 12वीं संचालन समिति की बैठक में यह बात कही है। 12वीं संचालन समिति की बैठक की मेजबानी भारत कर रहा है।
प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक ने कहा, सीबीआई, भारत की प्राथमिक भ्रष्टाचार-विरोधी जांच और अभियोजन एजेंसी है, और ईडी धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अपराध की आय का पता लगाने, उसे रोकने, जब्त करने और वापस लौटाने के लिए अधिकृत एजेंसी है। यूएनसीएसी में निहित आधुनिक भ्रष्टाचार-विरोधी ढांचे के तहत, संपत्ति की वसूली कोई गौण बात नहीं है, बल्कि प्रवर्तन की सफलता का सबसे सच्चा मापदंड है। उन्होंने बताया कि ईडी ने भ्रष्टाचार के मामलों सहित लगभग 5.6 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्ति वापस दिलाई है, जिसमें से एक महत्वपूर्ण हिस्सा पिछले कुछ वर्षों में ही हासिल किया गया है। ईडी के निदेशक ने भारतीय जांचकर्ताओं के लिए ग्लोबई उपकरणों के व्यावहारिक महत्व को भी स्वीकार किया, विशेष रूप से स्पेन द्वारा एक मामले में दी गई सहायता का उल्लेख किया, जहां नेटवर्क के माध्यम से साझा की गई जानकारी के आधार पर औपचारिक चैनलों के माध्यम से संपत्तियों को जब्त किया गया। केंद्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक ने ग्लोबई नेटवर्क के सुरक्षित संचार मंच को सदस्य प्राधिकरणों के बीच एन्क्रिप्टेड, वास्तविक समय सूचना आदान-प्रदान के लिए एक अत्यंत प्रभावी उपकरण बताया है। निदेशक ने ने कहा समय पर और समन्वित कार्रवाई से अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने और अवैध संपत्तियों की बरामदगी सुनिश्चित करने में निर्णायक अंतर आ सकता है।