ई दिल्ली:सरकार ने विपक्षी पार्टियों से बात करने के बाद महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन पर आम सहमति बनाने का प्रस्ताव रखा है। इस संशोधन के तहत अधिनियम को आने वाली जनगणना और जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से अलग किया जाएगा। सरकार ने सुझाव दिया है कि पहले कदम के तौर पर 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में मौजूद एक विपक्षी पार्टी के सांसद ने बताया कि एक प्रस्ताव यह था कि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाता है, तो लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाए। सांसद ने कहा कि लोकसभा की बढ़ी हुई सीटों की संख्या के आधार पर इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं। सरकार में बीजेपी की सहयोगी पार्टी के एक अन्य सांसद ने भी इस बात की पुष्टि की कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने पर विचार कर रही है और सभी राज्यों की सीटों का अनुपात वैसा ही रहेगा जैसा अभी है। इससे दक्षिणी राज्यों की उस आशंका का समाधान हो जाएगा, जिन्होंने अपनी आबादी के अनुपात में सीटों की बढ़ोतरी का ज़ोरदार विरोध किया था। सूत्रों ने बताया कि बैठक में अमित शाह द्वारा रखे गए सुझावों के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। एक सांसद ने बताया कि हर राज्य में महिलाओं की सीटों का फ़ैसला करने के लिए लॉटरी सिस्टम रखने का प्रस्ताव भी दिया गया। सांसद ने कहा यह समझाया गया कि महिलाओं के लिए रिजर्व सीटों की कुल संख्या का फ़ैसला लॉटरी के आधार पर होगा। हर तीसरी सीट महिलाओं के लिए होने की संभावना है। सांसद ने कहा कि सीटों की संख्या 50 परसेंट बढ़ाई जाएगी और लोकसभा में हर राज्य के प्रतिनिधित्व का हिस्सा परसेंट में वही रहेगा। सांसद ने कहा, “हिंदी भाषी राज्यों में सीटों की संख्या बढऩे की उम्मीद है।” उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में यह संख्या 80 से बढक़र 120 हो जाएगी।
यत्र तत्र सर्वत्र