रांची: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में द्वितीय विश्व युद्ध के समय का बम पड़ा हुआ है। द्वितीय विश्व युद्ध सितंबर 1945 में आधिकारिक तौर पर खत्म हो गया था। हालांकि, लगभग 81 साल बाद भी इस दौर का बम झारखंड में मौजूद है। खास बात यह है कि इतने लंबे समय तक यह बम लोगों की नजरों से छिपा रहा। अब यह सुवर्णरेखा नदी के किनारे पाया गया है। इतना लंबा समय बीतने के बावजूद बम एक्टिव है और लापरवाही करने पर फट सकता है। ऐसे में पुलिस ने सेना की मदद लेने का फैसला किया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नदी किनारे मिले दूसरे विश्व युद्ध के समय के एक संदिग्ध बिना फटे बम को डिफ्यूज करने के लिए भारतीय सेना से मदद मांगी जाएगी। रांची से बम डिटेक्शन और डिस्पोजल स्क्वॉड ने बहरागोड़ा में साइट का इंस्पेक्शन किया और पाया कि डिवाइस एक्टिव और भारी है। एसएसपी ने बताया कि एम्युनिशन को डिस्पोज करने के लिए जरूरी प्रोसेस से जुड़ी फॉर्मैलिटी पूरी की जा रही हैं। बम डिटेक्शन और डिस्पोजल स्क्वॉड यूनिट ने पुलिस को बताया कि “ताकतवर बम को स्टैंडर्ड तरीकों से खत्म नहीं किया जा सकता” और इसके लिए आर्मी के पास मौजूद एडवांस्ड टेक्निकल एक्सपर्टीज की जरूरत है। इलाके को घेर लिया गया है, और गांव वालों को चीज के पास जाने या उससे छेड़छाड़ न करने की चेतावनी दी गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गैस सिलेंडर जैसा दिखने वाला यह बम पानीपाड़ा-नागुडसाई इलाके में रेत की खुदाई के दौरान मिला। उन्होंने कहा कि बम पर बने निशानों से पता चलता है कि यह अमेरिका में बना पुराना बम हो सकता है।
यत्र तत्र सर्वत्र