नई दिल्ली :देश के 204 पूर्व सैनिकों, रिटायर्ड अफसरों, पूर्व राजनयिकों और वकीलों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। इन लोगों का कहना है कि संसद परिसर में उनके हालिया व्यवहार से संसद की गरिमा और नियमों का उल्लंघन हुआ है। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर की ओर से पहले ही संसद परिसर में किसी भी तरह के प्रदर्शन पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन किया गया।
पूर्व अधिकारियों और सैनिकों ने एक पत्र जारी करते हुए कहा कि यह कदम न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि संसद जैसी संवैधानिक संस्था की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है। उन्होंने इसे ‘जानबूझकर की गई अवज्ञा’ बताया और कहा कि इससे यह संदेश जाता है कि व्यक्तिगत राजनीति को संस्थाओं की मर्यादा से ऊपर रखा जा रहा है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी और कुछ अन्य सांसद संसद की सीढिय़ों पर बैठकर चाय-बिस्किट लेते हुए प्रदर्शन कर रहे थे, जो संसद के स्तर के अनुसार बिल्कुल उचित नहीं है। उनका कहना है कि संसद केवल बहस और कानून बनाने का मंच है, न कि राजनीतिक प्रदर्शन का स्थान। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी और कुछ अन्य सांसद संसद की सीढिय़ों पर बैठकर चाय-बिस्किट लेते हुए प्रदर्शन कर रहे थे, जो संसद के स्तर के अनुसार बिल्कुल उचित नहीं है। उनका कहना है कि संसद केवल बहस और कानून बनाने का मंच है, न कि राजनीतिक प्रदर्शन का स्थान। उनका मानना है कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और जनता के बीच गलत संदेश देती हैं। पत्र में उन्होंने यह भी चिंता जताई कि विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी की जिम्मेदारी और भी ज्यादा है, इसलिए उनका व्यवहार अनुकरणीय होना चाहिए।
राहुल गांधी गैर-जिम्मेदार बयान देने से बचें : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर पर उनकी कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर फटकार लगाई। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने राहुल गांधी से ‘गैर-जिम्मेदार बयान’ देने से बचने को कहा और यह भी कहा कि वह स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ कुछ भी न बोलें। बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा क्या महात्मा गांधी भी वायसराय को संबोधित करते समय ‘आपका आज्ञाकारी सेवक’ लिखते थे? इससे कोई सेवक नहीं बन जाता। अगली बार कोई कहेगा कि महात्मा गांधी ब्रिटिश के सेवक थे। जस्टिस दत्ता की अगुवाई वाली बेंच ने चेतावनी दी कि अगर कांग्रेस नेता भविष्य में ऐसी कोई टिप्पणी करते हैं, तो उनके खिलाफ ‘स्वत: संज्ञान’ कार्रवाई शुरू करेगी। शीर्ष कोर्ट ने कहा यह स्पष्ट कर दें अगली बार ऐसा बयान आया तो हम स्वत: संज्ञान लेंगे। हम आपको हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में कुछ भी कहने की अनुमति नहीं देंगे। उन्होंने हमें आजादी दिलाई है और हम उनके साथ ऐसा व्यवहार करते हैं?
देश के 204 पूर्व सैनिक-अफसर राहुल गांधी के व्यवहार से नाराज, पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी से देश से माफी की मांग की