भारत किसी भी पक्ष से बात कर सकता है :फिनलैंड के राष्ट्रपति

मुंबई: फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो वैश्विक विवादों में हर पक्ष से बात कर सकता है। उन्होंने भारत की विदेश नीति को बहुत व्यावहारिक और वास्तविक बताया। स्टब के अनुसार भारत की यह खूबी उसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक विशेष स्थान दिलाती है।
राष्ट्रपति स्टब ने कहा आधुनिक संघर्ष स्थानीय युद्धों से आगे बढक़र क्षेत्रीय संकट बन गए हैं। उन्होंने कहा स्थिति नाजुक है। स्टब ने क्षेत्र में तनाव कम करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही देश झगड़ों से दूर रहने की कोशिश करें, लेकिन कोई भी इसके ग्लोबल असर से बचा नहीं जा सकता, क्योंकि इससे तेल की कीमतें, व्यापार और समुद्री मार्ग हमेशा प्रभावित होते हैं। फिनलैंड के राष्ट्रपति ने भारत की संतुलित विदेश नीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह नीति भारत को वैश्विक संघर्षों में कई पक्षों से संबंध बनाए रखने में मदद करती है। स्टब के अनुसार भारत उन दुर्लभ देशों में से है जो लगभग सभी से बात कर सकता है। इसकी विदेश नीति व्यावहारिक और यथार्थवादी है। भारत के गहरे गठबंधन नहीं हैं, जो इसे काफी खुला बनाता है। उन्होंने कहा कि भारत के रूस, यूक्रेन और अमेरिका के साथ संबंध उसे कूटनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में रखते हैं। यूक्रेन में चल रहे युद्ध का जिक्र करते हुए स्टब ने कहा कि रूस का आक्रमण रणनीतिक रूप से विफल रहा है। रूस यूक्रेन को रूसी बनाना चाहता था, लेकिन यूक्रेन यूरोपीय बन गया। वह नाटो के विस्तार को रोकना चाहता था, पर फिनलैंड और स्वीडन इसमें शामिल हो गए। रूस यूरोप का सैन्यीकरण कम करना चाहता था, लेकिन अब रक्षा खर्च बढ़ रहा है। ईरान से जुड़े तनावों पर स्टब ने कहा कि हाल के घटनाक्रमों ने क्षेत्र में जोखिम बढ़ा दिए हैं। उन्होंने ईरान के जवाबी हमलों को रणनीतिक गलती बताया। उन्होंने कहा कि भारत की आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था और गौरवशाली इतिहास यह बताते हैं कि आने वाला समय भारत का ही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का भी पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाओं को 1945 के बजाय आज की हकीकत के हिसाब से काम करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिनलैंड परमाणु शक्ति नहीं बनेगा और न ही अपनी जमीन पर परमाणु हथियार रखेगा, लेकिन वह नाटो की सुरक्षा रणनीति का हिस्सा जरूर रहेगा।

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